एआरटी और आईवीएफ़ तकनीक दिलाएगी बांझपन की समस्या से निजात: डा. शाीतल जिंदल
असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एआरटी और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन आईवीएफ़ तकनीक से बांझपन की समस्या से निजात दिलाकर हर घर के आंगन में किलकारी गूंज सकती है। नॉर्थ इंडिया के सबसे मशहूर और बड़े सेंटर जिंदल आईवीएफ़ ने अपने फ्लैगशिप प्रोग्राम एआरटी अपडेट सीएमई का 20वां एडिशन सफलतापूर्वक आयोजित किया। जिसमें इस बार की थीम थी बेसिक इंफर्टिलिटी और आईवीएफ के मिथक और सच्चाई। यह कार्यक्रम मंडी जिला के मंडी हाईटस होटल में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के बारे में जिंदल आईवीएफ़ के सभी सीनियर डॉक्टर डॉ. उमेश जिंदल और डॉ. शीतल जिंदल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम था। उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन मांडव हॉस्पिटल मंडी, कुल्लू वैली हॉस्पिटल कुल्लू, साईं हॉस्पिटल हमीरपुर और सिटी हॉस्पिटल कांगड़ा के सहयोग से किया गया। जिसमें 70 से ज्यादा डॉक्टरों ने भाग लिया। जिनमें जनरल प्रैक्टिशनर, गायनेकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट बनने की तैयारी कर रहे डॉक्टर शामिल थे। जिंदल आईवीएफ़ के सभी सीनियर डॉक्टर जैसे डॉ. उमेश जिंदल, डॉ. शीतल जिंदल और अन्य एक्सपर्ट्स ने इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। डॉ. स्वाति वर्मा, डॉ. निधि शर्मा, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. नीरजा चंदेल और डॉ. प्रभनीत कौर ने अपनी की-नोट स्पीच दी। वहीं, पैनल डिस्कशन में डॉ. गीतिका, डॉ. मनीषी मित्तल, डॉ. संगीता खट्टर और डॉ. उदय भानु ने हिस्सा लिया। ये कार्यक्रम हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को नई जानकारी और सटीक इलाज की दिशा में मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था। जिंदल आईवीएफ़ की सीनियर कंसल्टेंट और आईवीएफ़ -पीजीटी स्पेशलिस्ट डॉ. शीतल जिंदल ने बताया कि मंडी में हुए 20वें एआरटी अपडेट में डॉक्टरों की इतनी बड़ी और उत्साही भागीदारी यह साफ दिखाती है कि हमें एडवांस फर्टिलिटी एजुकेशन को सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इस तरह की जानकारी को गांव और छोटे इलाकों तक पहुंचना बहुत जरूरी है। जब ग्रामीण हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को नई और सही जानकारी मिलती है, तो वे अपने मरीजों को बेहतर इलाज दे पाते हैं जोकि न सिर्फ मेडिकल तौर पर सही होता है बल्कि मरीजों की भावनाओं को समझते हुए और उनकी जरूरतों के हिसाब से होता है। इस तरह की पहल से इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट का पूरा नजरिया बदल सकता है और हर व्यक्ति को समान प्रजनन स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है। हम अपने सभी पार्टनर्स, स्पीकर और अटेंडीज का दिल से धन्यवाद करते हैं जिनके सहयोग और मेहनत से यह प्रोग्राम सफल हो पाया। महिलाओं में बांझपन के मुख्य कारणों में टयूब का बंद हो जाना, टीबी और कैंसर के मरीजों में यह समस्या सबसे अधिक रहती है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से मंदबुद्धि बच्चों के जन्म और अन्य वंशानुगत बीमारियों का इलाज भ्रूण के माध्यम से संभव है। इसके अलावा बार-बार बच्चा गिरने , गर्भ धारण न कर पाने और मर्दों में शुक्राणुओं की कमी को भी दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं में 35 से 40 की उम्र के बीच गर्भ धारण की समस्या हो जाती है। जबकि पचास साल की उम्र के बाद महिला और पचपन साल की उम्र के पश्चात पुरूषों के शुक्राणु बनने बंद हो जाते हैं।












