पर्यटकों की हरकतों से चौहार व छोटाभंगाल घाटी के लोग परेशान
चौहार घाटी व छोटाभंगाल में अतिथि देवो भव: वाली कहावत सही ढंग से चरितार्थ नहीं हो पा रही है। यहां वाले सभी पर्यटकों से यहां के होटलों, गेस्ट हाउसों, रेस्ट हाउसों तथा कैंपिंग के संचालकों के बजाय इनके आसपास अपनी दुकानें चला रहे दुकानदार, निजी घरों तथा गांव में रहने वाले सभी लोग यहां आने वाले सभी पर्यटकों से प्रसन्न ही नहीं है बल्कि बेहद खफा है। इसका कारण यह है कि यहां आने वाले दिन भर आराम से दोनों घाटियों की सुंदर वादियों को निहार कर खूब मस्ती करते हैं मगर जहां–जहां भी पर्यटक अपने लिए कमरों की बुकिंग करते हैं वहां पर आधी–आधी रात तक अपने आप में मस्त होकर जोर-जोर से बूफर, डीजे आदि में बजने वाले गाने की धुन तथा स्वयं ही जोर–जोर से गाने गाकर में खूब डांस करते हैं, जिस कारण आसपास के लोगों की नींद हराम हो जाती है। इस कारण उनके इस कारनामे से आसपास में रहने वाले परेशान लोग सुबह उन पर्यटकों को इसके लिए रोकने की बात करते हैं, तो उन पर्यटकों सहित वे सभी पर्यटन व्यवसायी स्थानीय लोगों का सहयोग करने की बजाय अपनी अच्छी कमाई के चलते उन पर्यटकों का ही भरपूर सहयोग कर लड़ाई करने में ही उतारू हो जाते हैं जो कि सरासर ही गलत है। यहीं नहीं रास्ते तथा सड़कों में चलते समय भी आगे पीछे न चल कर चौड़ाई में झुंड बना कर पंक्तियों चल कर पूरी सड़क को रोककर राहगीरों को भी उनके साथ दो-चार होने को मजबूर होना पड़ जाता है वहीं यहां आने वाले पर्यटक यहां की सिंगल लैन सड़क पर शहरों की तरह फोरलेन सड़कों की तर्ज पर वाहन चलाते हैं तो उस दौरान स्थानीय वाहन चालक उनसे पास देने के लिए इशारा करते हैं उस दौरान वे पर्यटक मनमानी कर उनके साथ भी बेंहस आदि करने पर उतर जाते हैं। दान सिंह, जय सिंह, सुरिंद्र कुमार, प्रेम चंद, रागी राम, तिलक ठाकुर, गंगू राम आदि वहां चालकों सहित स्थानीय लोगों मान सिंह, सूरज चंद, राज कुमार आदि ने कहा कि यहां के लोग भी अन्य क्षेत्रों की तरह घर आए मेहमानों का आदर सत्कार तथा पूरी तरह इज्जत करना भली भांति जानते हैं मगर यहां आने वाले पर्यटकों द्वारा की जाने वाले मनमाने रवैये से निजात के लिए सरकार तथा प्रशासन से मांग की है।












