जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक विकास से तबाह हो रहा है हिमाचल-भूपेंद्र
धर्मपुर-सरकाघाट और हिमाचल के अन्य इलाकों में पिछले कुछ वर्षों से बरसात के मौसम में पहले की तुलना में बारिश के कारण नुकसान बहुत ज्यादा हो रहा है।जिसके बारे में बहुत से विचार लोग प्रकट कर रहे हैं और कुछ तो इसे दैवीय प्रकोप कह कर असली कारणों से ध्यान हटाने का काम कर रहे हैं। लेकिन असली बजह जलवायु परिवर्तन और हिमाचल प्रदेश में सड़कों, हाईडल प्रोजेक्टों और अन्य अवैज्ञानिक विकास है।ये आपदा और उससे तबाही कोरोना महामारी के अलावा दूसरी दुर्लभ प्राकृतिक घटना है।भूपेंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में इस साल सामान्य से दोगुना अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है जो पिछले सौ वर्षों में सबसे ज्यादा है। इसका एक पहलू ये भी है की इस बरसात में दो अलग मौसमीय चक्र इस बार एक दूसरे को ओवरलैप कर रहे हैं।पहला मानसून और दूसरा पश्चिमी विक्षोभ दो अलग मौसमीय प्रणालियां हैं ।आम तौर पर मानसून गर्मी के मौसम में और पश्चिमी विक्षोभ सर्दी के मौसम में सक्रिय होते हैं। लेकिन इस साल मानसून की समाप्ति पर पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना दुर्लभ घटना है। जिसके कारण भारी बारिश हो रही है। दूसरी मुख्य बजह पिछले लंबे समय से यहाँ पर हो रहा अवैज्ञानिक विकास जिसमें फोरलेन, एनएच सड़के और हाईडल प्रोजेक्ट हैं।जिसके बारे में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गटक़री ने भी सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि इनकी डीपीआरें ही गलत बनाई गई है जिनकी समीक्षा करने की ज़रूरत है।निर्माण कम्पनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए स्टीप कटिंग, अनियंत्रित बलास्टिंग, खनन और डंम्पिंग करती हैं और वही मलवा बरसात में आपदा का प्रमुख कारण बन रहा है।जिसका जीता जागता उदाहरण हमीरपुर-सरकाघाट-धर्मपुर-मंडी एनएच है।लेकिन इन निर्माण कंपनियों पर कोई भी सरकार एक्शन नहीं लेती है। उन्होंने कहा कि ये सब कोई ईश्वरीय दंड नहीं है, न ही किसी देवता का श्राप या किसी लोकल नास्त्रेगमस के जालंधर राक्षस और ससुर के युद्ध की भविष्यवाणी का असर है। ये सब एक वैज्ञानिक और भौतिक घटना है और इसके लिए सरकारें और निर्माण कंपनियां जिम्मेदार हैं। इसलिये सरकार को विकास की लंबी अवधि की योजना बनानी होगी जो हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप हो और जो लोग व कम्पनियां अवैध निर्माण कर रहे हैं उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कर्यावाई करनी होगी अन्यथा जैसा सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश तबाह हो सकता है।












