आपदा ने सराज घाटी का बदला नक्शा, घर-मकान ध्वस्त, लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज विधानसभा क्षेत्र में थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा ने सबसे भीषण त्रासदी का रूप ले लिया है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन के कारण क्षेत्र में भयावह तबाही मची है। थुनाग बाजार में लगभग 150 मकान और दुकानें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं, वहीं जरोल बाजार भी तबाह हो गया है। जंजैहली में भी जल प्रलय ने भारी तबाही मचाते हुए पूरा नक्शा ही बदल दिया है। सराज घाटी अलग-थलग पड़ी हुई है। आपदा ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। सभी सड़कें और पुल ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे थुनाग का शेष दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है। बिजली और पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं, जिससे राशन और पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति ने सूचना संग्रह और राहत कार्यों को मुश्किल बना दिया है। लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अस्पताल, स्कूल और सरकारी भवन भी इस आपदा की चपेट में हैं, जिन्हें बहाल करने में लंबा समय लग सकता है। राहत और बचाव कार्यों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और ग्रामीणों की टीमें जुट गई हैं। आपदा प्रबंधन टीम ने बगस्याड़ से 16 किलोमीटर पैदल चलकर थुनाग पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और एकजुटता के साथ राहत कार्यों में योगदान दिया, जिससे अभियान को गति मिली। स्थानीय निवासियों और प्रशासन ने सरकार से तत्काल हवाई सर्वेक्षण और एनडीआरएफ व सेना की मदद की अपील की है। लोग सोशल मीडिया के जरिए आपदा की तस्वीरें और वीडियो साझा कर मदद की गुहार लगा रहे हैं।
खाद्यान्न संकट ने बढ़ाई मुश्किलें, 38 पंचायतें तबाही की चपेट में
सराज क्षेत्र में 30 जून-1 जुलाई की रात आई आपदा के चौथे दिन 80 हजार की आबादी गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रही है। थुनाग उपमंडल की 38 पंचायतें, विशेष रूप से थुनाग, पखरैर, जरोल, पांडवशीला और चिउणी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हैं। खाद्य सामग्री की कमी के कारण लोग भूखे रहने को मजबूर हैं और बंद सड़कों ने राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा डाली है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को रैनगलू और जंजैहली में राशन किट पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण हेलीपैड तक नहीं पहुंच सके। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो और वीडियो से संकेत मिले हैं कि पखरैर में बादल फटने से तबाही मची, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश ने भूस्खलन और बाढ़ का कहर बरपाया। पेयजल संकट भी गहरा गया है। 25 पंचायतों को पानी देने वाली छड़ी खड्ड-शैटाधार पेयजल योजना ध्वस्त हो चुकी है। प्राकृतिक जल स्रोत क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण बारिश का पानी जमा कर गुजारा कर रहे हैं।
दर्जनों टावर ठप
संचार व्यवस्था ठप होने से राहत कार्य रुके हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क बहाल नहीं हुआ, और दर्जनों टावर ठप हैं। कांढ़ा के टावर की सिग्नल रेंज बढ़ाने की कोशिशें नाकाम हैं। थुनाग और जंजैहली में नियंत्रण कक्ष संचार के अभाव में निष्क्रिय हैं। बिजली आपूर्ति भी चार दिनों से बंद है, क्योंकि गोहर-थुनाग 33 केवी लाइन क्षतिग्रस्त है। चैल-जंजैहली सड़क का 10 फीसदी हिस्सा गायब है, और लंबाथाच-कलहणी-पंडोह, लंबाथाच-चिउणी-शैटाधार जैसी सड़कें ध्वस्त हैं। ग्रामीण संपर्क सड़कों का नामोनिशान मिट चुका है। आपदा प्रबंधन में प्रशासनिक तालमेल की कमी साफ दिख रही है। लोग खड्डों और नालों में अपनों को ढूंढ रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं, दर्जनों स्कूलों में मलबा घुसा है। प्रभावित लोग अनिश्चितता और संकट के बीच जी रहे हैं, और राहत कार्यों की धीमी गति उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है।
मौके पर सिर्फ पटवारी ही पहुंचा प्रशासनिक अधिकारी नहीं आया
सरोआ पंचायत के उपप्रधान देवेंद्र राणा उर्फ पम्मी ने बताया कि बारिश के दौरान जब यह आपदा आई तो एक छोटी सी खड्ड ने ऐसा रौद्र रूप धारण किया कि मंदिर की सराय और नौ परिवारों के घर, वाखली पुल, कुकलाह पुल, गावों को जोड़ने वाली सड़कें, बाइकें, स्कूटी, कारें और लोगों का घरेलू सामान सब कुछ पानी में बह गया। कुछ वाहन सिल्ट में फंसे हुए हैं। खड्ड के हर कोने में तबाही के निशान बिखरे हैं। अब तक सिर्फ पटवारी मौका देखने आया है, जबकि बाकी कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। न राशन मिला, न टेंट, न फौरी राहत। उन्होंने मांग की है कि बेघर हुए लोगों का तुरंत किसी सुरक्षित जगह रहने का इंतजाम किया जाए। इधर, जिले के अलग-अलग भागों में पांच रिलीफ कैंप में 357 लोगों को ठहराया गया है। इनमें मंडी में दो, थुनाग में दो और धर्मपुर में एक जगह रिलीफ कैंप स्थापित किए गए हैं।
सराज में अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी: जयराम
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सराज क्षेत्र में राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। लापता हुए दो दर्जन से अधिक लोगों की तलाशी में गंभीरता से काम किया जाए। जिस तरह की ये त्रासदी हुई है आज से पहले इतना नुकसान सराज में कभी नहीं हुआ है। बुधवार को अपने गृह विधानसभा क्षेत्र के कुकलाह और बगस्याड़ में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा कि सराज क्षेत्र में तीन दिनों से न तो बिजली है और न संचार सेवाएं चल रही है।
स्याठी में 20 घर क्षतिग्रस्त, सब कुछ बह गया
स्थाठी गांव में भूस्खलन से 20 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। 61 लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में आश्रय दिया गया है। स्थाठी गांव के प्रभावित परिवारों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि आपदा में लगभग पूरा गांव ही प्रभावित हो गया है। उनके पास तंबू लगाने के लिए भी जमीन नहीं बची है। जमीन उपलब्ध करवाने की मांग पर प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे मुख्यमंत्री सुक्खू ने आश्वासन दिया कि यदि क्षेत्र में सरकारी भूमि उपलब्ध होगी तो उन्हें आवंटित की जाएगी। वन क्षेत्र में यदि जमीन है तो यह मामला केंद्र के समक्ष उठाया जाएगा।












