विकास को तरसी छोटा भंगाल व चौहार घाटी
छोटा भंगाल व चौहार घाटी में नज़र दौड़ाई जाए तो अभी भी ये दोनों घाटियां पिछड़ी हुई नज़र आ रही है। आजतक सता में रहने वाली प्रदेश की सरकारों ने यहां का विकास तो करवाया है मगर भी बहुत कुछ विकास करवाने को शेष है। दोनों घाटियों का प्रतिनीधित्व करने वाले विधायकों ने यहां पर अपनी ओर से विकास करवाने के प्रयास तो खुब्ब किए हैं मगर अभी भी दोनों घाटियों के कई गांव लाइफ लाईन कही जाने वाली सड़क सुविधा से वंचित ही है तो कई स्थानों में सरकारेन पशुपालकों की सुविधा के लिए पशु औधालय ही नहीं खोल पाई है। चौहार घाटी के पर्यटन स्थल बरोट तथा छोटा भंगाल घाटी के राजागुन्धा में गर्मी के सीजन में पर्यटकों की बेहतर सुविधा के लिए सम्पूर्ण सुविधा मुहैया नहीं करवा पाई है, वहीँ महाविद्यालय मुल्थान को भी नाममात्र का ही खोल रखा है यहां पर प्राचार्य सहित प्रोफेसरों के पद खाली चलने के साथ - साथ यहां पर स्थापित लगभग सभी सरकारी संस्थानों में का भी यही हाल है। यहां पर इस महाविद्यालय के अलावा कोई भी बड़ा शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान भी नहीं है। दोनों घाटियों में सरकार शिक्षा व स्वास्थय व्यवस्था को सुदृढ़ करने मे भी नाकाम सिद्ध हुई है। घाटियों के पंचायत के वर्तमान व पूर्व प्रधान सुभाष ठाकुर, भागमल, रूप लाल, सुरेश कुमार, रोशन लाल, गंगी देवी तथा भीम सिंह सहित घाटीवासियों का कहना है कि अगर प्रदेश सरकारें इन दोनों घाटियों की ओर पूरी तरह से ध्यान देती तो इन दोनों घाटियों में ये सभी सुविधाएं बहुत पहले ही मिल जानी चाहिए थी मगर प्रदेश में सता में रहने वाली आजतक की किसी भी सरकारों ने यहां का विकास करवाने में पूरी तरह से रूचि नहीं दिखाई। दोनों घाटियों के समस्त लोगों ने प्रदेश की वर्त्तमान सरकार का ध्यान दोनों घाटियों की ओर करने की जोरदार मांग करते हुए कहा कि दोनों घाटियों में सम्पूर्ण विकास होने से ही इन दुर्गम घाटियों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।












