भयंकर बाढ़ में व्यासश्वेर महादेव की 400 वर्ष पुरानी नंदी प्रतिमा खंडित
- शिव भक्तों को लगा गहरा आघात
- गौवध से जोड़ कर देख रहे लोग, धरती को बचाने के लिए देश प्रदेश में गौवध पर रोक की मांग
ब्यास नदी का उफान शांत होने पर व्यासश्वेर महादेव की नंदी प्रतिमा खंडित पाई गई है। राजा सिद्ध सेन का काल से पहले निर्मित इस प्रतिमा के खंडित होने से शिव भक्तों को गहरा आघात लगा है। पिछले 400 सालों में नंदी और शिवलिंग को बाढ़ से कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन कुछ लोगों श्याम, मनोहर, अश्विनी आदि ने बताया कि नंदी का सिर खंडित होने का मतलब है कि देश प्रदेश में गौवध जारी है, जिस कारण प्रतिमा खंडित हुई है और पानी के वेग से खंडित होने का मतलब है कि निकट भविष्य में यदि देश प्रदेश में गौवध पर हर तरह से अंकुश नहीं लगाया गया, तो प्रकृति अपना प्रलय रूप धारण कर अगले वर्षों में तबाही मचा सकती है, इसलिए हिमाचल और केंद्र सरकार को देश के हर प्रांत में गौवध पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय स्वयं धरती है। इसलिए जब भी पृथ्वी पर पाप बढ़ जाता है तो पृथ्वी गाय का रूप धारण का भगवान विष्णु से पाप के नाश की विनती करती है। ब्यास और सुकेती के किनारे नंदी की प्रतिमा का टूटना बड़े प्रलय का संकेत है, जो अगले सात सालों में घटित होना निश्चित माना जा रहा है। ऐसे में गाय की रक्षा से ही मानव जाति और धरती की रक्षा हो सकती है।












