बेदखली रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी किसान सभा -कुशाल
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा लैंड सीलिंग एक्ट में हिमाचल सरकार द्वारा वर्ष 2000 में किसानों के कब्जे वाली भूमि उनके नाम नियमित करने के लिए कानून में जोड़ी गई धारा 163(ए) को निरस्त करने का फैसला गत 5 अगस्त को सुनाया गया है और सभी कब्जे हटाने के लिए 28 फरवरी 2026 की डेट तय कर दी है, जिससे किसानों में दहशत फैल गई है। हिमाचल किसान सभा हाई कोर्ट के इस किसान व आम गरीब विरोधी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है, जिसके लिए गोपालपुर और धर्मपुर से भी सहायता राशी एकत्रित की जा रही है। कोर्ट के फैसले से उत्पन्न हुई इस परिस्थिति पर चर्चा करने व अगली योजना तैयार करने के लिए एक बैठक सरकाघाट में पूर्व जिला पार्षद एवं किसान सभा के प्रभारी भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें हिमाचल किसान सभा के जिला अध्यक्ष कुशाल भारद्वाज विशेष तौर पर शामिल हुए। उन्होंने बताया की किसान सभा हिमाचल प्रदेश में सभी को पांच बीघा जमीन देने की मांग उठा रही है और उनके कब्ज़े वाली भूमि उनके नाम करने की भी बात लंबे अरसे कह रही है। भूपेंद्र सिंह ने बताया कि किसान सभा किसी भी किसान का घर गिराने का विरोध करेगी और यदि कहीं जोर जबर्दस्ती की जाएगी तो सभा प्रभावितों व जनता के सहयोग से ऐसा नहीं होने देगी और उसका एकजुट विरोध किया जायेगा। इस अवसर पर हिमाचल किसान सभा की गोपालपुर कमेटी का भी गठन किया गया, जिसमें देव ब्राडता के दिलीप सिंह को प्रधान दिनेश काकू को सचिव व मॉन सिंह को कोषाध्यक्ष बनाया गया। इसके अलावा संजीव कुमार, संतोष कुमार, अमर सिंह राणा, हेम राज, नरेश कुमार, वीरभद्र सिंह, एडवोकेट दिनेश ठाकुर, अमर सिंह, अच्छर सिंह और अमृत लाल को कमेटी सदस्य चुना गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि हिमाचल किसान सभा की सदस्यता ज्यादा से ज्यादा पंचायतों में की जाएगी और कमेटियां भी गठित की जाएंगी और उसके बाद खंड सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों व आम जनता की अन्य समस्याओं बारे में आवाज उठाई जाएगी।












