चौहार और छोटाभंगाल घाटी में विकास ठप, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के दौरे की उठी मांग
प्रदेश सरकार को सत्ता संभाले लगभग ढाई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन चौहार घाटी और छोटाभंगाल घाटी में विकास कार्यों की गति अत्यंत धीमी बनी हुई है। इन क्षेत्रों के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की बाट जोह रहे हैं। स्थानीय जनता का कहना है कि यहां न तो अब तक मुख्यमंत्री का दौरा हुआ है और न ही किसी विभागीय मंत्री ने इन घाटियों की सुध ली है। केवल विधायकों के औपचारिक दौरे हो रहे हैं, जिससे जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। घाटीवासियों की मांग है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां के सरकारी विभागों में खाली पद तुरंत भरे जाएं, बरोट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया जाए और डीनोटिफाई किए गए आईटीआई केंद्र को दोबारा नोटिफाई किया जाए।स्थानीय निवासी जसवंत सिंह, मिलाप चंद, दुर्गा दास, सनील दत्त, संजय कुमार, हीरा लाल, सुरिंद्र कुमार, बलदेव राज, वजिन्द्र सिंह, रत्तन चंद व कर्म चंद सहित दर्जनों लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि वे इन घाटियों का दौरा कर यहां की समस्याओं को स्वयं देखें। लोगों ने कहा कि जब तक मंत्री स्तर के दौरे नहीं होंगे, तब तक कोई भी योजना ज़मीन पर नहीं उतर पाएगी और घाटी यूं ही विकास से वंचित रह जाएगी।












