शहीद सूबेदार मेजर पवन कुमार की राजकीय स्मान के साथ अंत्येष्टि, हर आंख हुई नम
पाकिस्तान की ओर से अचानक की गई फायरिंग में जवाबी कार्रवाई के दौरान शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर निवासी सूबेदार मेजर पवन कुमार जरियाल (48) का तिरंगे में पार्थिव शरीर दोपहर 3 बजे जैसी ही क्षेत्र में पहुंचा हर किसी की आंख नम हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हुआ। पवन कुमार जरियाल की एक झलक पाने के लिए हजारों की संख्या में लोग उनके घर की ओर दौड़ पड़े।
शहीद पवन की पार्थिव देह उनके गांव पहुंची तो पूरे गांव में पाकिस्तान मुर्दाबाद और पवन कुमार अमर रहे के नारों से गूंजने लगे। उसके बाद शहीद पवन के पिता गरज सिंह ने उन्हें सलामी दी। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर जिला कांगड़ा पुलिस प्रशासन के भी कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे। बलिदानी पवन कुमार अपने पीछे बुजुर्ग पिता गरज सिंह, पत्नी सुषमा देवी, पुत्र अभिषेक कुमार और पुत्री अनामिका को छोड़ गए हैं।
उनका बेटा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है, जबकि बेटी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। बता दें कि भारतीय सेना की 25 पंजाब रैजीमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे सूबेदार मेजर पवन कुमार की तैनाती इन दिनों जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील पुंछ सैक्टर में थी। देश की रक्षा करते हुए दुश्मन की गोलियों का सामना किया और मातृभूमि की लाज बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। कांगड़ा जिले का शाहपुर उपमंडल आज शोकाकुल है। हर आंख नम है, लेकिन हर सीने में देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले अपने बेटे के लिए गर्व भी है। झुलाड़ गांव के सपूत सूबेदार मेजर पवन कुमार बीते दिन जम्मू-कश्मीर के पुंछ सैक्टर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की नापाक गोलीबारी का जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यह विडंबना है कि 2 महीने बाद ही वह सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था तथा देश की रक्षा करते हुए इससे पहले ही उन्होंने अपना बलिदान दे दिया।
पाकिस्तान मुर्दाबाद से गूंज उठा गांव
रविवार को जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव झुलाड़ पहुंचा, तो पूरा गांव सिसक उठा। गांव में मातम पसरा हुआ है, हर गली, हर घर से शोक की लहर उठ रही है। बावजूद इसके, हर किसी की आंखों में एक चमक थी, यह गर्व की चमक थी कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और सेना के अधिकारी शहीद को अंतिम विदाई देने और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। जैसे ही तिरंग में लिपटे शहीद जवान की पार्थिव गांव में पहुंची तो पूरा गांव सूबेदार मेजर पवन कुमार अमर रहे भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से गूंज उठा।
कलेजा फटा, लेकिन पिता में साहस भी दिखा
शहीद पवन कुमार का परिवार एक सैन्य पृष्ठभूमि से है। उनके पिता गरज सिंह भी भारतीय सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बेटे की शहादत की खबर सुनकर उनके पिता का कलेजा फट गया, लेकिन एक सैनिक के पिता का साहस भी दिखाई दिया। नम आंखों से उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि शायद यही उसके भाग्य में लिखा था। पवन अपने पीछे एक बेटा और बेटी छोड़ गए हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के लिए यह क्षति इतनी बड़ी और असहनीय है कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शहीद पवन कुमार को श्रद्धांजलि दी है और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद का यह बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता और ईश्वर से प्रार्थना की कि वह इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार को शक्ति प्रदान करें। इस मौके पर विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, केवल सिंह पठानिया, संसद राजीव भारद्वाज, भाजपा के नेता विपिन परमार, सरवीण चौधरी सहित कई राजनीतिक चेहरे भी मौजूद रहे। वहीं, उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में प्रभावित परिवार के साथ खड़ी हैं और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।












