खटारा बस में सफर कर जान जोखिम में डाल रहे लोग, मंडी–मियोट रूट पर अकसर हांफ जाती है बस
चौहार घाटी के मंडी–मियोट रूट पर हिमाचल पथ परिवहन निगम की खटारा बसों को चलाए जाने से लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोग इस रूट में जान जोखिम में डाल कर बस में सफर कर रहे हैं। गौरतलब है कि परिवहन निगम की मंडी डिपो की बस दो बजे मंडी से रवाना हो कर वाया बरोट से होते हुए रात्रि ठहराव मियोट में करती है और यह बस सुबह मियोट से अपने तय समय पर फिर से मंडी के लिए रवाना होती है मगर परिवहन निगम की नीले रंग की यह बस किसी तकनीकि खराबी के चलते कई बार जहां कहीं बीच सड़क में ही हांफ जाती है, जिससे सफर करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ जाती है, जिसका तरोताज़ा उदाहरण फिर एक बार देखने को मिला है। प्रतिदिन की तरह गत दिन भी यह बस मियोट बस ठहराव में रात्रि ठहराव करने के बाद अपने निर्धारित समय पर सुबह सात बजे मियोट बस ठहराव से मंडी के लिए रवाना हुई कुछ ही दूरी पर तकनीकी खराबी आ जाने के वहीं पर ही रुक गई। जिसके चलते बस पर बैठी सवारियों को बरोट तक पहुंचने के लिए निजी गाडियों के लिए अतिरिक्त किराया देना पड़ा साथ में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बड़ी झरवाड़ गांव के निवासी व पूर्व बार्ड सदस्य भागमल ने बताया कि उसके बाद खराब हुई उस बस को एक कारीगर द्वारा देर शाम को ठीक किया गया। बरोट– मियोट रूट पर चलने वाली मात्र एक बस पर आश्रित बड़ी झरवाड़, छोटी झरवाड़, खलैहल तथा मियोट गांववासियों में त्रिलोक चंद, इंद्र सिंह, अनिल कुमार, गोविंद सिंह, प्रताप चंद, नवीन कुमार, प्रेम सिंह, सुखराम तथा राजकुमार का कहना है कि इस रूट पर भेजी जाने वाली बस के खराब होने की आम बात हो गई है। क्योंकि प्रदेश सरकार तथा परिवहन निगम एक और इस बस रूट को नाहक ही कई–कई दिनों तक बंद ही कर देता है वहीं दूसरी और स्थानीय लोगों की जोरदार मांग करने के बाद जब भी इसे चालू किया जाता है तो मात्र उसी खटारा बस को ही भेजा जा रहा है जो कि बार ही तकनीकि खराबी के कारण जहां कहीं रूक जाती है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष भी चार अप्रेल को तकनीकि खराबी के चलते मियोट से तीन किलोमीटर की दूरी पर बड़ी झरवाड़ बस ठहराव के समीप खराब हो गई थी और इसके साथ–साथ हाल में 14 मई को बैजनाथ डिपो रात्रि ठहराव करने के बाद सुबह लोहारडी बस ठहराव से रवाना होकर मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर बरोट बस ठहराव के समीप अचानक ही खराब हो गई थी। उस समय भी बस पर बैठी सवारियों को दूसरा विकल्प ढूंढना पड़ा। लोग इन खटारा बसों में जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। खलैहल पंचायत के प्रधान तथा इन चार गांवों के इन लोगों सहित छोटाभंगाल घाटी के समस्त लोगों ने परिवहन निगम से मांग की है कि दुर्गम घाटियों में बस भेजने से पहले ही अच्छी तरह से जांच-परखकर कर भेजी जाए ताकि कोई अनहोनी घटना न हो तथा सफर करने वाली सवारियों को बीच सड़क में ही परेशानी का सामना न करना पड़े।












