विमल नेगी मामला: पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल, केंद्रीय जांच ब्यूरो के पास केस जाने से हिमाचल पुलिस की साख भी दांव पर
हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के मुख्य अभियंता विमल नेगी मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह सिर्फ एक मौत की गुत्थी नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर डगमगाते विश्वास का मामला बनता जा रहा है। उच्च न्यायालय के ताजा आदेश, जिसमें छुट्टी पर चल रहे शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया गया है, ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है, जहां न्यायिक समीक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। एकल न्यायाधीश पीठ ने 23 मई को जब इस मामले को सीबीआई को सौंपा था, तो उसने स्थानीय पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच की दक्षता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे। नेगी परिवार के लगातार आरोपों और स्थानीय पुलिस की जांच से असंतुष्टि के बीच, उच्च न्यायालय का यह कदम न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक माना गया था। अब, संजीव गांधी की याचिका पर उच्च न्यायालय का आंशिक राहत देना, जहां व्यक्तिगत टिप्पणियों पर नोटिस जारी किया गया है, यह दर्शाता है कि अदालत पुलिस अधिकारियों की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का भी ख्याल रख रही है, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया है कि जांच का हस्तांतरण सही था, क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाहों के बयानों को सुरक्षित रखने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है। यह परोक्ष रूप से स्थानीय पुलिस की साक्ष्य सुरक्षित रखने की क्षमता पर संदेह को उजागर करता है। जब एक उच्च न्यायालय को किसी मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपनी पड़ती है, तो यह स्थानीय पुलिस की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह न केवल वर्तमान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है, बल्कि जनता के मन में पुलिस पर भरोसे को भी कम करता है। संजीव गांधी को व्यक्तिगत राहत मिलने के बावजूद, मूल मुद्दा 'स्थानीय पुलिस की जांच की अक्षमता या अनिच्छा' बरकरार है।
क्या जांच को प्रभावित किया गया?
एक ऐसे मामले में जहां मृतक की पत्नी ने अपने पति पर विभागीय प्रताडऩा का आरोप लगाया है और फिर शव भी रहस्यमय परिस्थितियों में मिलता है, में स्थानीय पुलिस की भूमिका हमेशा गहन जांच के दायरे में रहेगी। क्या प्रारंभिक जांच में कोई कोताही बरती गई? क्या किसी दबाव में तथ्यों को दबाने या मोडऩे का प्रयास किया गया? सीबीआई की टीम इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। सीबीआई का शिमला एसपी कार्यालय में रिकॉर्ड खंगालना यह बताता है कि वह प्रारंभिक जांच के हर पहलू पर सवाल उठा रहे हैं।












