बाग पशोग पंचायत में विकास कार्यों में धांधली पर ग्रामीणों ने प्रधान पर लगाया गबन का आरोप
सिरमौर जिला के पच्छाद क्षेत्र की बाग पशोग पंचायत एक बड़े विवाद में घिर गई है। पंचायत के ग्रामीणों ने प्रधान राजेश्वरी शर्मा पर पंचायत के विकास कार्यों में गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। नाहन में पत्रकार वार्ता के दौरान ग्रामीण रणवीर सूद और जगदेव कुमार ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि पंचायत द्वारा 30 बेंचों के लिए ₹1.5 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि मौके पर केवल 11 बेंच ही लगे पाए गए।
तारीख और बिल में विसंगतियां
ग्रामीणों ने दो बिल प्रस्तुत किए, जिनमें एक 17 अप्रैल 2020 और दूसरा 1 अगस्त 2022 का था। ग्रामीणों का कहना है कि 2020 में न तो वर्तमान प्रधान पद पर थीं और न ही वर्तमान सचिव कार्यरत थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है।
ग्राम पंचायत भवन में लकड़ी की पैनलिंग के लिए किए गए कार्यों में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। कोटेशन में ओवरराइटिंग की गई है और आशु एल्युमिनियम सोलन के नाम से जारी परफॉर्म इनवॉइस में आइटम कोड, मात्रा और दरों का उल्लेख नहीं है। सभी बिलों में केवल “पेटी अमाउंट” दर्शाया गया है और किसी पर तारीख तक नहीं लिखी गई है।
कोटेशन एक दुकान से, भुगतान दूसरी को
कोटेशन आशु एल्युमिनियम के नाम से पारित की गई जबकि ₹3 लाख का भुगतान आशु ट्रेडर्स को किया गया, जिसकी पुष्टि ग्रामीणों ने RTI दस्तावेजों से क
ग्रामीणों ने मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों में भी घपले के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पंचायत सचिव और खंड विकास अधिकारी पर अधूरी जानकारी देने का भी आरोप लगाया।
प्रधान का पक्ष
इस पूरे मामले पर पंचायत प्रधान राजेश्वरी शर्मा से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच एसडीएम पच्छाद द्वारा की जा रही है और रिपोर्ट जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।












