गाद के साथ ब्यास में बही हजारों टन करोड़ों की इमारती लकड़ी
ब्यास नदी में कुल्लू जिला के गुड्सा, मनीकर्ण और सैंज घाटी में बादल फटने से भयंकर बाढ़ की चपेट में बेशकिमती वन संपदा भी बह कर पंडोह डैम जलाश्य में इस तरह से फैल गई। अब सवाल उठने लगे हैं कि ये अथाह वन संपदा किस की थी? कानून थी या तस्करी के लिए जमा की गई थी। वन विभाग हर बार की तरह चुप क्यों हो जाता है? बता दें कि यह पहला मौका है जब डैम से रात के अंधेरे मे लकड़ी रूपी चंदन के इस जखिरे को पानी में बहा दिया गया। हालांकि लकड़ी ये विडियो और फोटो बुधवार को ही वायरल हो गए थे तब भी वन विभाग हरकत में नहीं आया। जबकि वन परिक्षेत्र अधिकारी पंडोह में ही बैठते हैं। वे इस वन संपदा को बचा सकते थे मगर वे कुम्भकरणी निद्रा में ही रहे। बता दें कि 2023 की बाढ़ में भी करोड़ों की लकड़ी डैम से एक रात में ही $गायब हो गई थी। जिसका हिमाचल विधानसभा में बड़ा मुद्दा बना था। तब भी वन विभाग की आंखें नहीं खुल रही है आखिर क्यों.. क्या वन विभाग को इस लकड़ी की जानकारी पहले से थी। यदि नहीं था तो इस वन सम्पदा को बचाया क्यों नहीं गया। ये सवाल आमजनता वन विभाग से सोशल मीडिया के माध्यम से जानने की उत्सुक हैं। इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी पंडोह से संपर्क किया गया मगर उधर से कोई जबाव नहीं मिला। जबकि वन मंडलाधिकारी नाचन एस एस कश्यप ने बताया कि उन्हें भी सोशल मीडिया से इस लकड़ी की जानकारी मिली थी उन्होंने स्थानीय वन अधिकारी व कर्मचारी मौका पर तैनात कर दिए थे। मगर वन संपदा को बाहर निकाल ने में असहाय थे।












