जोगिंद्रनगर और लडभड़ोल अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, मरीज बेहाल
उपमंडल जोगिंद्रनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही हैं। जोगिंद्रनगर नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक महीने से अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या में कमी बनी हुई है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में वर्तमान में केवल तीन डॉक्टर नियमित रूप से कार्यरत हैं, जिनके ऊपर पूरा अस्पताल संचालित करने का जिम्मा है। इन डॉक्टरों को ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और वार्ड ड्यूटी तक संभालनी पड़ रही है, जिससे काम का दबाव काफी बढ़ गया है और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। अस्पताल में डिलीवरी, सर्जरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई बार मरीजों को इलाज के लिए टांडा या पालमपुर जैसे बड़े अस्पतालों की ओर रेफर करना पड़ता है, जिससे गरीब और दूरदराज के मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति को थोड़ा संभालने के लिए प्रशासन ने दो अन्य डॉक्टरों को सप्ताह में केवल दो दिन डेपुटेशन पर भेजा है। लेकिन यह व्यवस्था न तो पर्याप्त है और न ही स्थायी समाधान मानी जा सकती है।
लडभड़ोल अस्पताल की भी हालत चिंताजनक
वहीं, लडभड़ोल क्षेत्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। यहां भी वर्षों से डॉक्टरों की संख्या अधूरी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए या तो निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है या फिर लंबी दूरी तय कर जोगिंद्रनगर या बैजनाथ पहुंचना पड़ता है।












