चौहार व छोटा भंगाल घाटी बारिश के कारण आलू की फसल खराब
मौसम के बिगड़ते मिजाज ने चौहार घाटी तथा छोटा भंगाल घाटी के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगभग एक सप्ताह से दोनों घाटियों के दुर्गम गांवों में हर दिन बारिश व अंधड होने से यहां के किसानों की नकदी फसल आलू को विपरीत असर पड़ रहा है। मई माह में मौसम का आलम इस तरह का हो गया है कि लोगों को मौसम के बिगड़ते मिजाज के कारण ठंड से कांपना पड़ रहा है। बता दें कि दोनों घाटियों में गत लगभग एक सप्ताह से प्रतिदिन दोपहर बाद भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि तथा अंधड़ का प्रकोप जारी चला हुआ है। दोनों घाटियों में बुधवार को भी दिन के समय भारी बारिश व ओलावृष्टि का सिलसिला जारी रहा है, वहीं गत मंगलवार की शाम को भारी बारिश होने के कारण छोटी झरवाड़ गांव के सतपाल की लगभग सोलह हजार बंद गोभी की पनीरियां बारिश के पानी में बह गई है। कई जगहों पर नकदी फसल आलू के पौधे भी बारिश के तेज बहाव में बह गए हैं। दोनों घाटियों के दुर्गम गांवों में पक चुकी जौ की फसल की कटाई करने में एक तो देरी हो रही है वहीं दूसरी ओर हर दिन बारिश होने से जौ की फसल काली पड़ रही है। दोनों घाटियों के किसानों में से पवन कुमार, रुप लाल, सतपाल, रागी राम, नरपत, सनी कुमार आदि का कहना है कि मई माह में घाटियों के दुर्गम गांवों में भी गर्मी की तपिश महसूस होती थी मगर इस बार तो ऐसा लग रहा है कि गर्मी के मौसम में रैन सीजन शुरू हो गया है, जोकि किसानों की खेतीबाड़ी के लिए बेहद घातक है।












