तुर्किये सेब पर संभावित प्रतिबंध से बागवानों में जगी नई उम्मीद
हिमाचल प्रदेश के सेब उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ आने की संभावना है। तुर्किये से आयातित सेब पर संभावित प्रतिबंध न केवल स्थानीय बागवानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा, बल्कि यह देश के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो सकता है। यह सिर्फ व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि भारतीय किसानों के हितों की रक्षा और 'वोकल फॉर लोकल' (स्थानीय के लिए मुखर) जैसे अभियानों को बल देने वाला कदम है। पिछले कई वर्षों से, तुर्की सहित 44 देशों से होने वाले सेब के आयात ने हिमाचल के बागवानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा में धकेल दिया था। विशेष रूप से, तुर्किये से आने वाला सेब, जो देश के कुल आयात का एक बड़ा हिस्सा है, ने स्थानीय मंडियों में कीमतों को बुरी तरह प्रभावित किया। वर्ष 2024 में, जिन बागवानों ने बेहतर दाम की उम्मीद में अपने सेब को कोल्ड स्टोरेज में रखा था, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिससे भंडारण के प्रति उनका उत्साह कम हो गया था। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री से तुर्की के सेब आयात पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह कर चुके हैं। उनका यह कदम न केवल हिमाचल के बागवानों की आवाज उठाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
मिलेगा उचित मूल्य
इस वर्ष हिमाचल में समय पर बारिश और रोग मुक्त वातावरण के कारण सेब की गुणवत्ता बेहतरीन रहने की संभावना है। ऐसे में, यदि तुर्की के सेब पर प्रतिबंध लगता है, तो यह बागवानों के लिए 'दोहरी खुशी' साबित होगी। उन्हें न केवल अपनी उपज के लिए उचित और लाभकारी मूल्य मिलेगा, बल्कि कोल्ड स्टोरेज में सेब रखने का निर्णय भी एक मुनाफे का सौदा बन जाएगा।
पूरी क्षमता के साथ चमकेगा
यह निर्णय केवल सेब के आयातनिर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि को विदेशी दबाव से मुक्त करने और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की व्यापक नीति का हिस्सा बन सकता है। हिमाचल के सेब, अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध, अब देश के बाजार में अपनी पूरी क्षमता के साथ चमकने के लिए तैयार हैं।












