सुंदरनगर के जंगमबाग की तर्ज पर लाछ -गाता ओर लठरली गांव के विस्थापितों को भी मिले आवासीय सुविधा
सराज विधानसभा क्षेत्र इस बार बरसात त्रासदी का केंद्र बिंदु रहा है। इसका प्रवेश द्वार ग्राम पंचायत तादी की लाछ पहाड़ी धीरे धीरे पंडोह डैम झील की ओर धंसती चली जा रही है। इसमें बसे लगभग 35 परिवारों का जीवन भी खतरे की जद में आ चुका है। लाछ, गाता और लठरली गांव के 7 परिवारों ने अपने घर छोड़ कर किराए के मकानों में रहना शुरू कर दिया है। अब जब बरसात थमी हुई है तो ये लोग अपने खेत खलिहान की देखरेख में आ रहे हैं और वहां अपने टूटे आशियानों को देख कर घुट घुट कर रोने को विवश हैं। हो भी क्यों ना पाई-पाई जोड़ कर जिंदगी भर की कमाई लगा कर बहुत बड़े और सुन्दर घर बनाए थे। ताकि उनके बच्चों का भविष्य भी सुन्दर हो सके। इन गांव में पीड़ित परिवारों में 7 फौजी भी शामिल हैं। बता दें कि ये गांव बीएसएल परियोजना विस्थापितों के गांव है। इनकी सोना उगलती जमीन पडोह डैम जलाशय में बाखली गांव के रूप में जलमग्न हो चुकी है। अब दुसरी बार ये लोग अपने गांव से विस्थापित हो रहें हैं। हर रोज कोई ना कोई परिवार पलायन को मजबूर हैं। पीड़ित राम लाल ने मांग करते हुए कहा कि बीबीएमबी हमें सुंदरनगर के जंगमबाग हादसे के पीड़ितों की तर्ज पर बीबीएमबी पंडोह के अस्थाई आवास उपलब्ध करवाए जाएं। तथा घर बनाने के लिए भी बीबीएमबी की सरप्लस जमीन हमें दी जाए, क्योंकि ये जमीनें हमारे पुरखों ने केवल डैम निर्माण के लिए कौड़ियों के मुआवजे पर दी थी। हम दिए हुए मुआवजे को वापिस करने को भी तैयार है। उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि उनके टूटे घरों को दिखा कर कई संस्थाएं आपदा के नाम पर राहत बांट रही है। मगर यह राहत हमारे गांव में ही नहीं अन्य गांव में जाकर बिना जरूरत के लोगों में बांटी भी जा रही। जो बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा जिस को भी राहत राशि या सामग्री देनी है, वो दें मगर हमारे घरों को और हमारे गांव के नाम पर किसी ओर जगह पर ना बांटे। बता दें कि रविवार को एक पुरी गाड़ी में राशन, कम्बल और जूते आदि बांटे गए। जिनको जरूरत भी नहीं है उन्हें भी खूब राहत सामग्री बांटी गई। जो गलत है। पंचायत प्रधान तादी अमरावती ठाकुर ने इन पीड़ित परिवारों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बीबीएमबी को जल्द ही इन्हें अस्थाई आवास देने चाहिए जो इनका अधिकार है। पंडोह डैम विस्थापित कल्याण समिति के संस्थापक अध्यक्ष बीआर भाटिया ने कहा कि बीबीएमबी के कारण ही इन लोगों के घर बार जमीन तबाह हो रही है। झील के कारण पूरी पहाड़ी धंस रही है। इसलिए इन पीड़ित परिवारों को राहत के रूप में आवासीय सुविधा दी जानी चाहिए तथा सरप्लस जमीन केवल ओर केवल पडोह डैम विस्थापितों का अधिकार है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस मसले पर गंभीरता से निर्णय लेने की मांग की है।












