एनएच निर्माण कंपनी व भूमि आवंटन बारे गलत जानकारी दे रहे हैं सांसद अनुराग ठाकुर : माकपा
राष्ट्रीय उच्च मार्ग 003 (अटारी-लेह वाया हमीरपुर-सरकाघाट-धर्मपुर-मंडी) का निर्माण कार्य चार साल पहले शुरू हुआ था। उस समय हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनुराग ठाकुर केंद्र सरकार में मंत्री थे और अब भी सांसद हैं। लेकिन गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी के घटिया किस्म के निर्माण कार्य को लेकर उन्होंने चार साल तक कुछ नहीं कहा। माकपा नेता व पूर्व ज़िला पार्षद भूपेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि 23 जून को पाढ़छू पुल गिरने के बाद अनुराग ठाकुर ने 25 जून को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा और जांच की मांग की। 13 जुलाई को उन्होंने गिरे पुल का निरीक्षण किया और 15 जुलाई को समीरपुर में कंपनी व मौरथ (MORTH) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर कंपनी को काम सुधारने के निर्देश दिए।भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि अब मीडिया में जो खबरें अनुराग ठाकुर के मीडिया सेल द्वारा प्रकाशित करवाई जा रही हैं, वे सच्चाई से कोसों दूर हैं और जनता को गुमराह करने वाली हैं। उन्होंने बताया कि फेज-1 (हमीरपुर से पाढ़छू पुल तक) के लिए मूल ठेका गावर कंपनी को दिया गया था, जिसने यह कार्य सूर्या कंपनी को सबलेट किया था। लेकिन पिछले साल सितंबर में सूर्या कंपनी से काम वापिस ले लिया गया था और अब गावर कंपनी खुद यह निर्माण कर रही है। ऐसे में सांसद द्वारा यह प्रचार करना कि सूर्या का ठेका उनकी शिकायत के बाद रद्द हुआ, पूरी तरह से झूठ है।उन्होंने यह भी कहा कि पिछले चार सालों से सांसद और भाजपा नेताओं के संरक्षण में ही गावर कंपनी घटिया निर्माण कार्य कर रही थी, लेकिन तब सब चुप थे। अब जब किसान सभा और प्रभावित लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध तेज किया और पुल गिर गया, तब लोकप्रियता हासिल करने के लिए यह दिखावा किया जा रहा है।भूपेन्द्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा का कोई नेता इस कंपनी के खिलाफ कुछ नहीं बोलता क्योंकि इसमें भाजपा के बड़े नेताओं के नाम जुड़े हैं। अवाहदेवी, चोलथरा, रखोह, सरकाघाट जैसे क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति महीनों से खराब है। चोलथरा बाज़ार की स्थिति बहुत ही दयनीय है। वहां बाईपास सड़क भाजपा नेत्री के घर को बचाने के लिए बदली गई थी। अब जब चोलथरा में बाईपास सड़क और पुल टूट गया है, तो कंपनी और मौरथ के अधिकारी भाजपा नेता के घर में बैठकर मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।सांसद अनुराग ठाकुर 30 जून को धर्मपुर में हुई त्रासदी के दो सप्ताह बाद स्याठी और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे और स्कूली बच्चों को अपने फोटो वाले बैग, कुछ राहत सामग्री और कोरे आश्वासन देकर लौट गए। जबकि वे चाहते तो अपनी सांसद निधि से प्रभावितों को आर्थिक सहायता दे सकते थे।स्याठी गांव के बेघर लोगों के लिए भूमि आवंटन को लेकर उन्होंने राज्य सरकार से बात करने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा, जबकि 1980 में बने वन संरक्षण कानून के तहत हिमाचल प्रदेश की 68 प्रतिशत भूमि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है और वही इसे आवंटित कर सकती है। ऐसे में यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इन बेघर और भूमिहीन हो चुके परिवारों के लिए केंद्र सरकार से जल्द से जल्द भूमि आवंटन करवाएं।भूपेन्द्र सिंह ने यह भी जानना चाहा है कि पाढ़छू पुल के गिरने और अवैध डंपिंग से हुए नुक़सान के लिए जिम्मेदार कंपनी पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसके बारे में जनता को जानकारी दी जाए।












