विमल नेगी मौत मामले में कई रहस्यों से पर्दा उठने की उ्मी, सीबीआई के डीआईजी खुद खंगाल रहे रिकॉड
हिमाचल प्रदेश में चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और सुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली से आई सीबीआई की टीम की एंट्री, जिसकी अगुवाई डीआईजी स्वयं कर रहे हैं, ने इस मामले को और अधिक संजीदगी प्रदान की है। इस प्रकरण ने सीधे तौर पर प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को निशाने पर ले लिया है, जिसके परिणामस्वरूप कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सीबीआई की टीम लगातार शिमला में डटी हुई है और विमल नेगी से जुड़े हर छोटेबड़े रिकॉर्ड को खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि टीम ने एसपी ऑफिस से हजारों पन्नों के रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। टीम हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के कार्यालय का रुख भी कर सकती है, जहां नेगी कार्यरत थे।
सरकार की भूमिका और आगे की राह
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती न देने का फैसला कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने सीबीआई जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है, जो इस बात का प्रतीक है कि सरकार मामले को दबाने की बजाय पारदर्शी तरीके से जांच कराना चाहती है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर असंतोष व्यक्त किया था, जिसमें हिमाचल कैडर के किसी भी अधिकारी को जांच में शामिल न करने की बात कही गई थी। यह एक संवेदनशील बिंदु है, जो राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के मनोबल और उनकी कार्यप्रणाली पर अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल सकता है।
संजय गांधी ने हाईकोर्ट में दायर की नई याचिक
विमल नेगी की रहस्यमयी मौत की जांच सीबीआई को सौंपने के हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ आईपीएस संजीव गांधी ने अब नई याचिका दायर की है। अवकाश पर चल रहे गांधी ने 23 मई के एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए, जांच में सीबीआई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह नया घटनाक्रम तब सामने आया है जब गांधी द्वारा अपनी आधिकारिक हैसियत से दायर की गई पिछली अपील को प्रक्रियात्मक खामियों के कारण खारिज कर दिया गया था। गांधी ने अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है।












