टांकरी लिपि व मंडयाली बोली को समर्पित जगदीश कपूर, साहित्यिक गतिविधियों में भी है दखल
मंडी शहर में जन्मे, पले, बढ़े जगदीश कपूर पुरातन लिपि 'टांकरी' के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं। वे मंडयाली बोली के विकास के लिए भी समर्पित हैं। इसके अलावा वे साहित्यिक क्षेत्र में भी दखल रखते हैं।
'अनंत ज्ञान' से विशेष भेंटवार्ता में कहा कि उनकी स्कूली व कालेज की शिक्षा दीक्षा शहर के ही स्कूल व कॉलेज में हुई है जबकि स्नातकोत्तर व आयुर्वेद रत्न की उपाधियां प्रदेश के बाहर से प्राप्त की हैं। वे ग्रामीण बैंक में प्रबंधक के पद पर सेवारत रहे हैं। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के चार जिलों में कार्य किया है। डांगरी लिपि के प्रति उनके झुका हुआ जुड़ाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनके दादाजी व ताया जी व्यापारी थे और वे अपना हिसाब किताब टांकरी में लिखते थे। उस जमाने में कागजों की कमी होने की वजह से कभी-कभी दीवारों पर भी हिसाब किताब लिखने थे तो उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि यह टेढ़े-मेढ़े शब्द क्या लिखे गये हैं। इन टेढ़े-मेढ़े शब्दों को पढ़ने की लालसा ने ही उनकी रुचि इस ओर पैदा की। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने टांकरी लिपि का ज्ञान हासिल किया और वर्ष 2018 में मंडयाली टांकरी के नाम से एक पुस्तक का पहला संस्करण प्रकाशित किया। इस पुस्तक का दूसरा संस्करण भी प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस प्रकाशित पुस्तक का जब विमोचन हुआ तो वहां पर उन्हें जानकारी मिली कि टांकरी लिपि की एक हस्तलिखित प्रति किसी कबाड़ी के पास है। यह सूचना मिलने पर उन्होंने उसे पुस्तक को कबाड़ी से लेने का मन बनाया। लेकिन कबाड़ी उस किताब को देने के लिए तैयार नहीं था। आखिर में उन्होंने उसकी फोटो प्रति के लिए मना लिया। हालांकि वह पुस्तक की पांडुलिपि ना होकर मुद्रित प्रति ही थी। उन्होंने बताया कि टांकरी लिपि के प्रचार प्रसार के लिए सरकारी तौर पर भी कुछ छुटपुट प्रयास किए गए हैं पर जिस पैमाने पर इस लिपि को संरक्षित करने की जरूरत है उसमें कमी है। उन्होंने बताया कि मंडयाली बोली को भी उचित संरक्षण व संवर्धन करने की आवश्यकता है। उन्होंने आभार किया कि टंगरी लिपि वह मांड्याली बोली को प्राचरितमा प्रसारित करने के लिए सभी का योगदान आवश्यक है जगदीश कपूर साहित्यिक क्षेत्र में भी विशेष दखल रखते हैं। उनकी कविताएं, लघु कथाएं व अन्य लेख कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है। जबकि उनकी एक पुस्तक 'मुईए मेखे तू केस लेखे' भी प्रकाशित हुई है। भविष्य में उनकी और प्रकाशन की भी योजना है।












