आधार कार्ड अपडेट प्रक्रिया को आसान बनाए सरकार : एन. के. पंडित की मांग
- नाम के भिन्न होने से हजारों महिलाएं वंचित हो रहीं सरकारी योजनाओं से, जरूरी दस्तावेज होते हुए भी हो रही परेशानी
मंडी सदर ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता एन. के. पंडित ने केंद्र की मोदी सरकार और हिमाचल की सुक्खू सरकार से आधार कार्ड अपडेट प्रक्रिया को सरल करने की अपील की है। उनका कहना है कि मायके और ससुराल में नाम में भिन्नता होने के कारण हजारों महिलाएं सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं। एन. के. पंडित ने रविवार को मंडी से जारी एक प्रेस वक्तव्य में बताया कि उनके पास ऐसी कई महिलाओं की शिकायतें आई हैं, जो नाम सुधार कराने के लिए कई बार डाकघरों के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल और खर्चीली है कि सामान्य परिवार की महिलाओं के लिए यह मुश्किल बन जाती है। उन्होंने मंडी शहर की रहने वाली सोनिया शर्मा का उदाहरण देते हुए बताया कि सोनिया के पास स्कूल प्रमाणपत्र, हिमाचली बोनाफाइड प्रमाण-पत्र, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और बैंक खाता जैसे सभी सरकारी दस्तावेज हैं — फिर भी महज नाम के मामूली अंतर को लेकर उन्हें आधार कार्ड अपडेट कराने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। सोनिया शर्मा के अनुसार, डाकघर कर्मी उनसे दो समाचार पत्रों में नाम बदलने की सूचना प्रकाशित करने और फिर अधिवक्ता के माध्यम से शपथ पत्र बनवाने को कह रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
जब पर्याप्त प्रमाण हों, तो कागज़ी प्रक्रिया क्यों?
सोनिया शर्मा का कहना है कि जब उसके पास पहले से ही मान्य दस्तावेज, शपथ पत्र और सरकारी प्रमाणपत्र हैं, तो आधार नाम अपडेट के लिए अखबारों में विज्ञापन देना और अधिवक्ता से प्रक्रिया कराना आवश्यक नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस प्रक्रिया को डिजिटल और प्रमाण-आधारित बनाने की मांग की है।
लाखों महिलाओं की है यही व्यथा
एन. के. पंडित ने जोर देते हुए कहा कि यह समस्या सिर्फ सोनिया शर्मा की नहीं, बल्कि हिमाचल सहित पूरे देश में लाखों महिलाओं की है, जिनके मायके और ससुराल के नाम अलग-अलग दस्तावेजों में दर्ज हैं। ऐसी महिलाएं पेंशन, राशन, आवास, उज्ज्वला गैस, और अन्य लाभकारी योजनाओं से वंचित रह जाती हैं।उन्होंने सरकार से मांग की कि आधार अपडेट प्रक्रिया को सरल, डिजिटल और प्रमाण-आधारित बनाया जाए।












