शारीरिक शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही सरकार
सरकार शारीरिक शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। पिछले पांच वर्षों से शारीरिक शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति नहीं हो रही है। यह बात हिमाचल प्रदेश शारीरिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ललित चौहान व प्रदेश मुख्य मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार ने प्रेस को जारी संयुक्त बयान में कही। उन्होंने कहा कि पूर्व में तो माननीय उच्च न्यायालय का स्टे था, लेकिन वर्तमान में शारीरिक शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति को लेकर को स्टे नहीं है, ऐसे में सरकार को इस दिशा में प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अलग अलग चल रहे गर्ल्स और बॉयज वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को मर्ज कर एजुकेशनल बनाने पर डीपीई के पदों को दूसरे वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में दिया जाए। शारीरिक शिक्षा पढ़ने वालों की संख्या ज्यादा है और पद स्वीकृत नहीं हैं। सरकार प्रदेश सभी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के डीपीई के पद सृजित करे, क्योंकि ऐसे स्कूलों की संख्या सैकड़ों में है और शारीरिक शिक्षा के विषय को अनिवार्य विषय रूप में स्कूलों पढ़ाया जाए। शारीरिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मांग की है कि शारीरिक शिक्षकों के 870 स्वीकृत पदों पर जल्दी भर्ती की जाए। डीपीई के 150 के लगभग रिक्त पदों पर प्रक्रिया शुरू की जाए। जल्द ही स्कूलों में टूर्नामेंट होने वाले हैं। शारीरिक शिक्षकों की कमी से टूर्नामेंट करवाना भी चुनौती बन जाएगा, क्योंकि विभाग आदेशानुसार दूसरे विषय के अध्यापक की ड्यूटी बच्चों के टूर्नामेंट में नहीं लगेगी और न ही अध्यापक बच्चों को टूर्नामेंट में ले जाएंगे।












