गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर जोगिंदर नगर में श्रद्धा, सेवा और समर्पण का भावपूर्ण आयोजन
सिख धर्म के इतिहास में अद्वितीय बलिदान और आध्यात्मिक महानता के प्रतीक श्री गुरु अर्जन देव जी के पवित्र शहीदी दिवस पर जोगिंद्रनगर में शुक्रवार को गुरु सिंह सभा की ओर से भव्य और श्रद्धा से परिपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर के गुरुद्वारा दर्शनी डयोड़ी में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक गुरुद्वारा साहिब में शब्द कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें रागी जत्थों ने गुरबाणी के माध्यम से संगत को निहाल किया। कीर्तन की मधुर ध्वनि और श्रद्धा से भरे वातावरण ने उपस्थिति को आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा से भर दिया। गुरुद्वारे के बाहर राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए ठंडे मीठे शरबत की छबील लगाई गई। स्वयंसेवकों ने प्रेमपूर्वक सेवा करते हुए राहगीरों को शरबत पिलाया। तेज धूप में यह सेवा राहत और सुकून का माध्यम बनी। हेड ग्रंथी सेवा सिंह ने श्री गुरु अर्जन देव जी के जीवन और शहादत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु अर्जन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद थे, जिन्होंने सत्य, न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्राण न्योछावर किए। 'आदि ग्रंथ' का संकलन कर सिख धर्म को दिशा और आधार दिया। स्वर्ण मंदिर (हरिमंदिर साहिब) का निर्माण भी उन्हीं की देन है। मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास पर तपती ईंटों पर बैठकर जान कुर्बान कर दी। यह बलिदान मानवता के लिए अमर प्रेरणा है। गुरुद्वारा कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए अटूट लंगर की व्यवस्था रही, जिसमें सभी ने मिल-बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सरदार गुरप्रीत सिंह, सचिव सरदार जगजीत सिंह, अन्य सेवादार और संगत के सदस्य उपस्थित रहे। गुरु जी के बलिदान को नमन करते हुए संगत ने सेवा, समर्पण और सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। समापन पर अरदास कर विश्व शांति, भाईचारे और समाज में सद्भावना की कामना की गई।












