102 और 108 सेवा के 1400 कर्मचारी 24 घंटे रहे हड़ताल पर, प्रदेशभर में दिए धरना
हिमाचल प्रदेश में बुधवार को किसी भी मरीज को इमरजेंसी में एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पाई। 102 और 108 एंबुलेंस के 1400 कर्मचारी मंगलवार रात 8 बजे से लेकर बुधवार रात 8 बजे तक 24 घंटे की हड़ताल पर रहे। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों, शिमला में एनएचएम दफ्तर और सेवा प्रदाता कंपनी के धर्मपुर स्थित दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। हड़ताल की वजह से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एंबुलेंस कर्मियों की तीन प्रमुख मांगें
एंबुलेंस कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगे हैं। पहली नौकरी से निकाले गए 14 कर्मचारियों की बहाली। दूसरी ट्रांसफर किए गए कर्मियों को पहले के स्टेशन पर रखना और तीसरी मांग जनवरी 2020 के हाईकोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक मानदेय देना।
कोर्ट के आदेशानुसार मानदेय मांग रहे
एंबुलेंस कर्मी लंबे समय से कोर्ट के आदेशों के मुताबिक न्यूनतम मानदेय की मांग कर रहे हैं, मगर इनकी मांग को अनदेखा किया जा रहा है। 10 से 15 साल की नौकरी के बावजूद इन्हें लगभग 11 हजार 300 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है।
सीटू के बैनर तले बनाई यूनियन
एंबुलेंस कर्मचारियों ने बीते दिनों सीटू के बैनर तले यूनियन का गठन किया था, ताकि अपने हकों की लड़ाई लड़ी जा सके। इसके बाद एंबुलेंस सेवाप्रदाता कंपनी ने कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है और कुछ को ट्रांसफर किया है।
पहले ही बता दिया था हड़ताल के बारे में
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के महासचिव बालकराम ने बताया कि उन्होंने पहले ही कंपनी को हड़ताल का नोटिस दे दिया था, मगर कंपनी ने उनकी मांगें नहीं मानी। इससे उन्हें मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ा है। वहीं, एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ऊना के उपप्रधान कुलबीर सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की तरफ से बार-बार कंपनी के समक्ष मांगों को उठाया गया है, बावजूद इसके कंपनी पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है।
कंपनी की मनमानी के खिलाफ लड़ेंगे लड़ाई : विजेंद्र मेहरा
सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने बताया कि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी हिमाचल प्रदेश के हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद न्यूनतम मानदेय नहीं दे रही है। कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है और कुछ को ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के हितों के खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। कंपनी की मनमानी अब नहीं चलेगी। यूनियन की ओर से इसके खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी।












