सत्या: प्रवासी संवेदना और जड़ों की तलाश करती कविताएं
मंडी में जन्मी वर्तमान में न्यू जर्सी अमेरिका में रहने वाली हिंदी की कवयित्री ज्योति साहनी की तीसरी काव्य कृति का विमोचन जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान सभागर मंडी में किया गया। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने बतौर मुख्यअतिथि और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गंगाराम राजी ने पुस्तक विमोचन समारोह की अध्यक्षता की। जबकि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित मनोहर लाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। सत्या काव्य संग्रह का विमोचन ज्योति साहनी की माता सत्या देवी के अलावा जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी, डा. गंगाराम राजी, पंडित मनोहर लाल, डा. विजय विशाल के कर कमलों से किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रेवती सैनी ने कहा कि ज्योति साहनी ने दूर देश में रहते हुए भी अपनी भारतीय विरासत, परंपराओं को नहीं छोड़ा, यह बहुत ही प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि वे अपने नाना पहाड़ी चूड़ामणी पंडित भवानी दत्त शास्त्री और माता जी के आदर्शों को अपने परिवार और बेटे-बेटी में भी रोपित कर रही है। कवयित्री ज्योति साहनी ने कहा कि वो भले ही अमेरिका में रहती है, मगर अपनी जन्मभूमि मंडी की याद उनके मन सदैव रहती है। इसलिए वह जब भी समय मिलता है अपनी जड़ों की ओर लौटने का प्रयास करती है। यहां के पहाड़ मुझे हर पल अपने पास बुलाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य के संस्कार उन्हें अपने नान जी पंडित भवानी दत्त शास्त्री से मिले, जिन्होंने श्रीमद भगवत गीता और उपनिषदों का अनुवाद मंडयाली बोली में किया था। इस अवसर पर साहित्यकार मुरारी शर्मा ने ज्योति साहनी की पुस्तक पर आलोचनात्मक लेख पढ़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी लेखक से हमारा पहला परिचय उनकी रचनाओं से होता है। और सत्या के माध्यम से ही ज्योति साहनी से परिचय हुआ है। उनकी इन कविताओं में प्रवासी संवेदना और स्मृतियों के माध्यम से कवयित्री अपनी जड़ों की तलाश करती प्रतीत होती है। डा. गंगा राम राजी ने कहा कि ज्योति साहनी पंडित भवानीदत्त शास्त्री की नातिन होने की वजह से उनसे मिले साहित्य के संस्कारों को सहेज रही है। प्रवासी भारती होने के बावजूद वह अपनी जन्मभूमि के प्रति समर्पित है। इस अवसर पर पंडित मनोहर लाल ने कहा कि साहित्यकारों को किसी भी तरह की राजनीति के प्रभाव न आकर समाज की पक्षधरता में खड़े रहना चाहिए। कार्यक्रम की संयोजक सरिता शर्मा ने सभी साहित्यकारों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ज्योति साहनी की माता जी सत्या देवी, पति जीतन साहनी, बेटी तनीषा, बेटा हर्षुल व अन्य सगे संबंधी मौजूद रहे। इस अवसर पर लोक गायिका कृष्णा ठाकुर ने मंच का संचालन किया।
इन्होंने किया कविता पाठ:
इस अवसर पर बहुभाषी कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृष्ण चंद्र महादेविया, पवन चौहान, रतन लाल शर्मा, सुरेंद्र मिश्रा, डा. राकेश कपूर, जगदीश कपूर, मुरारी शर्मा, प्रियंवदा शर्मा, लतेश कुमार, राजेंद्र ठाकुर, निर्मला चंदेल, कृष्ण ठाकुर, विद्या शर्मा, पुर्णेश गौतम, शुक्ला शर्मा, विजय विशाल, मनोहर अनमोल, सविता कुमारी आदि ने कविता पाठ किया।












