सरसों तेल फर्जीवाड़े में फूड सेफ्टी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
. बिना फूड लाइसेंस के बिक रहे सरसों तेल की जांच क्यों नहीं की गई
. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों के लाइसेंस व गुणवत्ता की जांच फूड सेफ्टी अफसर को करनी होती है अनिवार्य
देवभूमि में बिना फूड लाइसेंस के बिके यूनिवर्सल गोल्ड सरसों तेल मामले में फूड सेफ्टी अफसरों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत फूड लाइसेंस व गुणवत्ता की जांच का प्राथमिक जिम्मा फूड सेफ्टी ऑफिसर का होता है। फूड सेफ्टी अफसर का कार्य रूटीन में बाजार, होटलों, फैक्ट्रियों, गोदामों और दुकानों से खाद्य सामग्री के नमूने लेना और संदिग्ध, मिलावटी, एक्सपायर्ड या अनहाइजीनिक भोजन की पहचान करना है। इसी तरह जांच के दौरान लिए गए खाद्य नमूनों को राज्य या केंद्रीय प्रयोगशाला में भेजना और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई करने के साथ-साथ खाद्य मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी अहम कार्य है। फूड सेफ्टी अफसर ही अनाधिकृत या नियम विरुद्ध पाए गए खाद्य व्यवसायों पर चालान, जुर्माना या उसे बंद कराने जैसी कार्रवाई करते हैं और केस बनाकर न्यायालय में प्रस्तुत करते हैं, वहीं उपभोक्ताओं व विक्रेताओं को जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर, वर्कशॉप और सेमिनार का आयोजन कर खाद्य सुरक्षा के नियमों की जानकारी देते हैं। इसके उलट हिमाचल में पिछले लंबे समय से चल रहे सरसों तेल के फर्जीवाड़े पर फूड सेफ्टी अफसरों ने एक भी जगह सैंपल लेने या चेकिंग करने की जहमत नहीं उठाई। अब तक खाद्य अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसे लेकर उनकी भूमिका पर सवालिया निशान पैदा हो गया है।
फूड सेफ्टी विभाग ने नहीं की कोई कार्रवाई
खाद्य अधिनियम के तहत बिना फूड लाइसेंस के खाद्य वस्तुओं की बिक्री व अधिनियम के उल्लंघन पर अधिनियम की धारा 31, 34, 59 आदि के तहत मामला दर्ज करना होता है। आवश्यकता पड़ने पर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, लेकिन धर्मपुर में बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद भी अब तक फूड सेफ्टी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं है।
नहीं किया पंजाब के उच्चाधिकारियों को सूचित
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद सामने आए खरीद-फरोख्त के बिल में भी यूनिवर्सल सरसों के तेल का ब्यौरा मिला है। बावजूद इसके प्रशासनिक अमले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, इसने भी कई सवाल खड़े किए हैं। बद्दी की हिम एग्रो इंडस्ट्री के तार पंजाब के जालंधर में हरि संस ऑयल एंड केमिकल कंपनी के साथ जुड़ने पर अब तक पंजाब के उच्चाधिकारियों को भी सूचित क्यों नहीं किया गया है, जिसके कारण भी पूरा मामले में तरह-तरह की आशंकाओं को बल मिल रहा है।
5 दिन में 18,300 पैकेट तेल आया, लेकिन वापस भेजा गए सिर्फ 6,264 पैकेट
बद्दी की हिम एग्रो इंडस्ट्रीज के पास 5 जून 2025 को जालंधर की हरि संस कंपनी ने 9000 पाउच की सप्लाई की, जबकि 10 जून 2025 को 9300 पैकेट सरसों के तेल की सप्लाई की गई। इस बीच अखबार में फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। इसके उलट बद्दी की हिम एग्रो ने 22 जून को केवल 6,264 पैकेट ही हरि संस कंपनी को भेजे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाकी के पैकेट कहां गए। अगर उन्हें उपभोक्ताओं को बेचा गया है तो फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने अब तक हिमाचल में मुहिम चलाकर उन फर्जी पाउच को इकट्ठा करने की जहमत क्यों नहीं उठाई है ताकि देवभूमि के बाशिंदों की सेहत से खिलवाड़ पर अंकुश लगाया जा सके।
क्या कहते हैं
फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर सचिन लखनपाल ने कहा कि वह 6 दिन की ट्रेनिंग पर थे आज ही आया हूं उन्हें इस संदर्भ में कुछ भी मालूम नहीं है। उधर, एलडी ठाकुर असिस्टेंट कमिश्नर फूड सेफ्टी का कहना है कि इस मामले में सबसे बड़ी नाकामी पुलिस की है। जब थाना प्रभारी को धर्मपुर राशन डिपो पर 140 पेटी बिना फूड लाइसेंस वाली यूनिवर्सल गोल्ड सरसों तेल की होने का समाचार मिल गया था, तो उन्हें तुरंत फूड सेफ्टी विभाग को सूचित करना चाहिए था। ऐसी क्या वजह है कि उन्होंने सूचना नहीं थी और न ही तेल को गायब होने से रोकने की कोशिश की। इस मामले की गहनता से जांच की जाएगी, जो भी लिप्त होगा, उसके खिलाफ करवाई सुनिश्चित की जाएगी।












