स्याठी आपदा पर राजनीति गर्म, पुनर्वास की मांग के बीच केंद्र-राज्य में आरोप-प्रत्यारोप
धर्मपुर उपमंडल के स्याठी गांव में 30 जून को आई भारी बारिश से बेघर हुए डेढ़ दर्जन परिवारों की मूल समस्या पुनर्वास की अभी तक अनसुलझी है। मंदिर में अस्थायी रूप से शरण ले चुके इन परिवारों को अब तक तीस लाख रुपए की मदद मिली है, लेकिन घर बसाने के लिए जमीन का मुद्दा अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच जिम्मेदारी टालने का विषय बन गया है। प्रभावितों की कमेटी ने त्रैम्बला धार स्थित नैना माता मंदिर में बैठक कर स्पष्ट किया कि वे फिलहाल मंदिर में ही रहना चाहते हैं और वहां अस्थायी कैबिन बनाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने नाल्ड गौसदन के पास खाली जमीन पर शेड बनवाने, मुआवजे की पारदर्शी रिपोर्ट देने और सरकार की पांच हजार रुपए मासिक किराए योजना की लिखित अधिसूचना देने की मांग उठाई है। पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री मौके पर आकर लौट गए, लेकिन जमीन आवंटन के मुख्य मुद्दे पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने केंद्र सरकार के अधीन वन भूमि कानून (1980) को अड़चन बताया और कहा कि इसी वजह से 2023 की आपदा में प्रभावित कई परिवार आज तक किराए के मकानों में हैं। सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा जमीन के लिए राज्य सरकार से बात करने की बात को भूपेन्द्र सिंह ने गोलमोल करार दिया और कहा कि असली प्रयास दिल्ली में होने चाहिए थे। प्रभावितों ने मांग की है कि भविष्य में सुरक्षित स्थान पर उन्हें बसाया जाए, जहां से वे अपने पारंपरिक खच्चर परिवहन व मजदूरी जैसे कार्य भी जारी रख सकें। साथ ही, मंदिर में यदि लंबे समय तक रहना पड़े तो शौचालय व स्नान की व्यवस्था भी जरूरी है।












