अब हिमाचल में परियोजना प्रभावितों को मिलेगा चार गुणा मुआवजा, किसानों में जगी उम्मीद की किरण
हिमाचल प्रदेश में अब फोरलेन, पनविद्युत परियोजनओं के प्रभावितों को फैक्टर टू लागू होने से चार गुणा मुआवजा मिलेगा। इससे हजारों किसानों -भूमि मालिकों को उनकी जमीनों का उचित मुआवजा मिलेगा। भूमि अधिग्रहण मंच मंडी के अध्यक्ष बीआर कौंडल ने माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले पर खुशी का इजहार करते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद परियोजना प्रभावितों को उम्मीद की किरण नज़र आई है। मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए बीआर कौंडल ने कहा कि उम्मीद है कि सरकार माननीय उच्च न्यायालय के फैसले को सीधे-सीधे लागू करने के बजाय उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। लेकिन फोरलेन संघर्ष समिति परियोजना प्रभावितों को जागरूक एवं संगठित करने के लिए फोरलेन संघर्ष समिति क्लेम फाइल करवाएगी। भूमि अधिग्रहण मंच के अध्यक्ष बेली राम कौंडल ने कहा कि सरकार हमेशा कहती आई है कि वो फोरलेन से प्रभावितों किसानों के बारे में चिंतित है किसी भी सरकार ने इस समस्या को हल नहीं किया है। जबकि 2018 में मंत्रिमंडल के सदस्य गोविंद ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। लेकिन तब भी कोई फैसला नहीं ले पाई। उन्होंने कहा कि बड़ी हैरानी की बात है कि फिर एक अप्रैल 2022 को मंडी में नई कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र ठाकुर, अन्य सदस्यों राकेश पठानिया व गोविंद ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रभावित किसानों को आश्वासन दिया गया था कि चार गुणा मुआवजे की अदायगी के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री गडकरी को पूछना होगा। उन्होंने कहा कि गडकरी जी पहले ही इस बारे में मनाली में कह कर गए थे कि यदि यदि राज्य सरकार चार गुणा मुआवजा लोगों को देना चाहती है तो केंद्र सरकार को उसमें कोई ऐतराज नहीं है। बीआर कौंडल ने कहा कि दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन कि बात में भी कह चुके हैं कि प्रभावित किसानों को चार गुणा मुआवजा दिया जाएगा। मगर तत्कालीन जयराम सरकार जिसे नजरअंदाज करती रही और अब कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने यह कहकर किसानों से वोट लिए की वे चार गुना मुआवजा लागू करेंगे। लेकिन विधानसभा चुनाव के उपरांत आज तक कोई बैठक इस बारे में नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल की कोई भी सरकार किसानों को चार गुना मुआवजा दिलाने की दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठा पाई। केवल सत्ता में आने के लिए विस्थापितों के नाम पर वोट की राजनीति ही होती रही। अब माननीय उच्च न्यायालय की अधिसूचना से किसानों को भूमि का चार गुणा मुआवजा मिलने की आस जगी है, जिससे आम जनता एवं किसानों को भारी राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने किसानों के साथ धोखा किया है, जिसका खामियाजा उनको भूगतना भी पड़ा है। इस अवसर पर मंच के संयोजक जोगिंदर वालिया ने कहा है कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने पहली अप्रैल 2015 की फैक्टर एक अर्थात दो गुणा मुआवजा अदायगी की अधिसूचना जारी की थी। दूसरी तरफ भाजपा ने 2017 में अपने दृष्टिपत्र में चुनावी वादा किया था कि अगर हमारी सरकार बनेगी तो हम फैक्टर -टू अर्थात चार गुणा मुआवजा प्रभावित किसानों को देंगे।वालिया ने बताया कि फोरलेन संघर्ष समिति की ओर से 22, अक्टूबर 2022 को मंडी में रैली की गई और 14 दिसंबर 2021 को विधानसभा धर्मशाला का घेराव कर मांग पत्र दिया गया। उन्होंने बताया कि संघर्ष की इसी कड़ी में बीते कई सालों से फोरलेन संघर्ष समिति व भूमि मंच अपनी आवाज़ उठाता रहा है। इसके अलावा फोरलेन संघर्ष समितियां, किसान सभा एवं भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच, पिछले 10 वर्षों लगातार संघर्ष के बाद हिमाचल सरकार द्वारा भूमि मुआवजे को लेकर पहली अप्रैल 2015 को अधिसूचना जारी की गई जो गैर कानूनी है, अन्याय पूर्ण है। हम लगातार मांग करते रहे कि इसे रद्द किया जाना चाहिए। अब माननीय उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश ने इस अधिसूचना को रद्द करने का फैसला लिया उसके लिए हम उच्च न्यायालय का आभार करना चाहते है और आशा करते हैं की किसानों को भूमि का चार गुना मुआवजा दिलाया जाएगा। जिससे आम जनता एवं किसानों को भरी राहत मिली है। इस अवसर मंडी-कोटली-धर्मपुर- जालंधर एनएच संघर्ष समिति कोटली के अध्यक्ष कमल शर्मा भी मौजूद रहे।












