आज भी दलितों पर अत्याचार होना दुर्भाग्यपूर्ण: शांता कुमार
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि जिस एक महारोग के कारण वेद उपनिषद, राम-कृष्ण के भारत वर्ष को सदियों तक गुलामी के काले दिन देखने पड़े। दुर्भाग्य से यह महारोग अभी भी भारत में विद्यामान है। कई कारणों से भारत के लोग बंटे, जातिगत भेदभाव बढ़ा। बहुत से लोगों को दलित कह कर दुतकारा, आपसी फूट बढ़ी और मुठ्ठी भर विदेशियों ने पूरे भारत को सदियों तक गुलाम रखा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य का विषय है कि आज भी देश में दलित अत्याचार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में दलित अत्याचार के प्रतिदिन 150 मामले दर्ज होते है। पिछले वर्ष 51 हजार मामले दर्ज किए गए। गरीब दलित धूमधाम के साथ शादी नही कर पाते। यदि दूले को घोड़े पर बैठाते है तो उन्हें अत्याचार सहना पड़ता है। आजादी के 78 वर्ष के बाद भी भारत में जातिगत दलित अत्याचार की घटनाएं बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। शांता कुमार ने कहा कि हिंदु समाज के नेताओं को इस संबंध में गंभीरता से विचार करना चाहिए। हिंदुओं में जिन गरीबों को दलित कहकर दुतकारा उन्हें ही विदेशियों ने स्वीकारा और इसी तरीके से भारत के करोड़ों लोग धर्म बदल कर विदेशी हो गए। इसी के कारण भारत के टुकड़े हो गए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मोहन भागवत ने एक बड़ी बात कही है कि यदि हिंदू समाज अब भी नहीं जागा तो कोई नया संकट खड़ा हो सकता है। प्रतिवर्ष मुसलमानों की संख्या बढ़ती जा रही है। उनमें कुछ ऐसे कटटरपंथी हैं, जो चार-चार शादियां करके बीस बच्चे पैदा करते हैं। कुछ बच्चे घर में बाकी घुसपैठ के लिए। इस काम के लिए उनको विदेशों से धन भी मिलता है। यदि हिंदु समाज अब भी नहीं जागा तो निकट भविष्य में एक और विभाजन की मांग खड़ी हो जाएगी।












