भारी बारिश ने उजाड़ी सराज घाटी की शांति, खतरे में आया पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का पुश्तैनी आशियाना
- तांदी गांव में दरकती जमीन और ढहती दीवारों के बीच पसरा दर्द, परिवार ने छोड़ा भरोसे का पुराना घर
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 30 जून और 1 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश ने सराज घाटी को गहरे जख्म दिए हैं। इस भयावह आपदा में न सिर्फ सैंकड़ों घर जमींदोज हो गए, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विधायक जयराम ठाकुर का तांदी गांव स्थित पुश्तैनी घर भी अब खतरे की जद में आ गया है। गांव के जिस हिस्से में उनका पुराना घर स्थित है, वहां जमीन धंसने लगी है। बारिश के चलते घर के साथ बनी गौशाला और टॉयलेट ढह चुके हैं, जबकि घर की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। प्रशासन ने वहां तिरपाल बिछाकर भूस्खलन से बचाव की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन जमीन का लगातार खिसकना चिंता बढ़ा रहा है। इस पुश्तैनी घर में फिलहाल जयराम ठाकुर के छोटे भाई बीरी सिंह अपने परिवार सहित रह रहे हैं, जबकि बड़े भाई अनंत राम का घर भी नजदीक ही है, जो अब इस प्राकृतिक कहर की जद में आता दिख रहा है। वर्षों तक यही घर जयराम ठाकुर की यादों और संघर्षों का गवाह रहा है, लेकिन अब बारिश की मार ने इन दीवारों की आत्मा को ही हिला दिया है। आपदा के कई दिन बाद आज जयराम ठाकुर स्वयं तांदी गांव पहुंचे और अपने परिवार से मुलाक़ात कर घर की स्थिति का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने पूरे क्षेत्र में हुए नुकसान का जायजा भी लिया। बताया जा रहा है कि जैसे ही बारिश तेज होती है, दोनों भाई सुरक्षित रहने के लिए जयराम ठाकुर के नए घर में शरण लेते हैं। सराज घाटी की यह त्रासदी न केवल बर्बादी की तस्वीर है, बल्कि उस धरती की पीड़ा भी है, जहां कभी हर आंगन में रौनक थी और अब हर कोने में सन्नाटा पसरा है।












