बनाते बनाते ही धंस गया फोर-लेन पुल का फुटपाथ हिस्सा
चंडीगढ़ मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर पंडोह के सात मील ब्यास व्यू होटल के साथ निर्माणाधीन फोरलेन पुल का फुटपाथ वाले पूरे हिस्से का लेंटर डालने के कुछ ही घंटों में जमींदोज हो गया। लगभग 100 मीटर का यह हिस्सा पूरा धंस गया। स्टील का पुरा जाला ही टेढ़ा हो गया। हालांकि पुल के पिलर व फाउंडेशन को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं है। मगर पूल का एक हिस्से चाहे वह फुटपाथ ही क्यों ना हो, का धंसना -टूटना निर्माण कंपनी की लापरवाही को दर्शाता है। यह प्रमाणित करता है कि इस निर्माण में प्रयोग की गई निर्माण सामग्री निम्न स्तर की है ।तथा इस कार्य में जुटे इंजीनियर की कार्यकुशलता पर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं। इस घटना से एनएचएआई भी लोगों की रडार पर आ गई। क्योंकि एनएचएआई की देखरेख यानी इंस्पेक्शन पर ही फोरलेन का कार्य होता है। इससे साफ होता है कि सड़क निर्माण व पूल जैसे बड़े निर्माण कार्य में निर्माण कम्पनी के साथ-साथ एनएचएआई भी संलिप्त हैं। जो बहुत ही दुखद है। बता दें कि केएमसी निर्माण कंपनी कार्य शुरू होते ही लोगों की नजरों में खटकने लगी थी। जिसका मुख्य कारण कंपनी की निम्न स्तर की कार्यप्रणाली, घटिया मटेरियल और अवैज्ञानिक कटिंग रहा है। इसे पत्थर बेचने वाली कम्पनी के नाम से जाना जाता है। अपने निर्माण को लेकर कम्पनी बहुत से विवादों में घिरी रही है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण पुल का टूटना आज सामने है। हैरत की बात है कि विवादों में घिरने के बाद भी कंपनी जिला प्रशासन की लाड़ली कम्पनी बनी रही है। आज तक कोई कार्रवाई कंपनी के खिलाफ नहीं हो सकी, जिससे कंपनी के हौसले बुलंद होते रहे और वे घटिया से भी घटिया निर्माण सामग्री बिना किसी डर के युज करते रहे। स्थानीय व्यवसाई देश राज ठाकुर ने कहा कि पूल का एक हिस्सा टूटना व भी बिना किसी व्यक्ति अथवा गाड़ी के नाम चलने से दर्शाता है कि कंपनी लोगों की जान माल से खेल रही है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। कम्पनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। जबकि पंचायत जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना के लिए केएमसी कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है और उन्होंने भी कम्पनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। जबकि केएमसी कंपनी के सीनियर क्वालिटी हेड विवेकानंद झा ने इस घटना पर कैमरे के सामने का कि यह हल्की सी गलती हमारे वर्कर्स के कारण पेश आई है। उन्होंने इस पर लोहड ज्यादा डाल दिया और कंक्रीट नीचे गिर गई। यह केवल मकान का छज्जा जितना है और कुछ भी नहीं। जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। पूल को या इसकी फाउंडेशन को कोई नुकसान नहीं हुआ है। पुल बहुत मजबूत है। कंपनी कुछ भी बोले मगर इस घटना ने केएमसी कंपनी की पोल खोल कर रख दी है।












