पूरी नहीं हुई चौहार घाटी में पशु चिकित्सालय खोलने की मांग, दुर्गम घाटी की 13 पंचायतों के 120 गांव प्रभावित
चौहार घाटी में पशु चिकित्सालय खोलने की मांग काफी समय से चली आ रही है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्राथमिकता के आधार पर पशु चिकित्सालय खोलने की एक बार फिर से सरकार से मांग उठाई है। इस अति दुर्गम घाटी की 13 पंचायतों में लगभग 120 गांव आते है। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन व खेतीबाड़ी करना है मगर पशु चिकित्सालय न होने से पशुपालकों को पशुओं के बीमार होने पर काफी परेशानी उठानी पड़ती है। पशुपालक गुड्डू राम, सुंदर लाल, शेर सिंह, पृथ्वी पाल, लछमन राम तथा धनी राम का कहना है कि सरकार ने घाटी में पशु औषधालय तो खोल रखे हैं मगर इनमें पर्याप्त मात्रा में दवाइयां नहीं मिल पाती है ऐसी स्थिति में पशुपालकों को 40 से 50 किलोमीटर दूर पद्धर या फिर जोगिंद्रनगर जाना पड़ता है। बरोट पंचायत के प्रधान डॉक्टर रमेश ठाकुर, लपास पंचायत के प्रधान रमेश चंद, वरधान पंचायत के प्रधान अनिल कुमार व घाटी के समस्त पशुपालकों ने सरकार से आग्रह किया है कि इस घाटी के पशुपालकों के साथ अन्याय न करते हुए चौहार घाटी के पशुपालकों की बेहतर सुविधा के लिए बरोट में एक बेहतर पशु चिकित्सालय को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए। उन्होंने कहा कि हालांकि साथ लगते छोटाभंगाल की मात्र सात पंचायतों के पशुपालकों की बेहतर सुविधा के लिए सरकार ने कई वर्ष पूर्व से ही पशु चिकित्सालय खोल रखा है। जिसका छोटाभंगाल घाटी समस्त पशुपालक भरपूर लाभ भी उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से जोरदार मांग की है कि छोटाभंगाल घाटी की तर्ज़ पर यहां पर भी पशुचिकित्सालय को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए।












