आपदा से लें सबक, अवैज्ञानिक निर्माण पर लगे रोक: डॉ. राकेश धरवाल
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव डॉ. राकेश धरवाल ने मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में आई भीषण आपदा पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक त्रासदी में जहां कई परिवार पूरी तरह उजड़ गए, वहीं सैकड़ों घर तबाह हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस आपदा में हुए जानी नुकसान की भरपाई तो नामुमकिन है, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार को हर संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए। डॉ. राकेश ने कहा कि इस आपदा से हमें सीख लेने की आवश्यकता है और यह सोचने की जरूरत है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जाए। उन्होंने सिराज क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में हुए अवैज्ञानिक और बेतरतीब निर्माण को आपदा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि पिछले 6-7 वर्षों में सिराज में जिस तरह सड़कों का अव्यवस्थित जाल बिछाया गया, नदी-नालों के किनारे घर बनाए गए और जंगलों की अंधाधुंध कटाई की गई, वह सब इस त्रासदी के पीछे का मुख्य कारण है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सिराज की भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज कर विकास कार्यों को अंजाम दिया गया, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा और आपदा का खतरा और बढ़ गया।
डॉ. धरवाल ने चिंता जताई कि जोगिंद्रनगर के साथ लगते बरोट और लुहारड़ी क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में भी पिछले कुछ वर्षों में होटल और घरों का अवैज्ञानिक निर्माण तेजी से हुआ है। बरोट, जो एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और ऊहल नदी पर बने ऐतिहासिक बांध क्षेत्र में स्थित है, भविष्य में गंभीर खतरे की चपेट में आ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यहां के बेतरतीब निर्माण पर लगाम नहीं लगाई गई, तो न केवल बरोट, बल्कि जोगिंदरनगर और इसके निचले इलाके भी गंभीर खतरे में आ सकते हैं। लुहारड़ी क्षेत्र तो पहले ही भूस्खलन और बाढ़ की मार झेल चुका है, लेकिन फिर भी वहां अव्यवस्थित निर्माण जारी हैं, जो भविष्य में विनाशकारी साबित हो सकते हैं।
अंत में डॉ. राकेश धरवाल ने स्थानीय प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की कि इन क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को रोका जाए और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए, ताकि न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिले, बल्कि जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।












