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सीएम सहित तीन मंत्रियों की थी हिमाचल की पहली कैविनेट

सीएम सहित तीन मंत्रियों की थी हिमाचल की पहली कैविनेट

- गौरी प्रसाद ने बनवाया था मंडी शिमला रोड़
- पहले राजधानी जाने के लिए जाना पड़ता था वाया पठानकोट- कालका

हिमाचल प्रदेश में प्रथम विधानसभा चुनाव 1951.52 में हुए थे और डॉ. यशवंत सिंह परमार ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उस दौर में पूरे प्रदेश में दो ही कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे, जिसमें मंडी के पंडित गौरी प्रसाद भी शामिल थे। लोक निर्माण मंत्री का कार्यभार संभालते ही इन्होंने सबसे पहले मंडी शिमला सड़क मार्ग की नींव रखी। बता दें कि इससे पहले शिमला जाने के लिए वाया पठानकोट.कालका होकर जाना पड़ता था। उस दौर में बसें भी इक्का दुक्का ही चलती थी और शिमला पहुंचने के लिए दो से तीन दिन लग जाते थे। पंडित गौरी प्रसाद ने इतिहास रचते हुए मंडी शिमला मार्ग तैयार करवा कर प्रदेश में विकास की नई इबारत लिख दी। यह बात होस्ट एंकर सीरीज के 25वें एपिसोड में एंकर सेवानिवृत्त प्रवक्ता नीरज शर्मा के साथ खास बातचीत में पंडित गौरी प्रसाद के सुपुत्र मुख्य महाप्रबंधक हिमाचल प्रदेश वित्त निगम हितेंद्र शर्मा ने बताई। उन्होंने कहा कि जोनल अस्पताल के विकास में पंडित गौरी प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र से लेकर रोजगार तक उन्होंने प्रदेश को अपने पैरों पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पहले चौहाटा में होते थे विरोध प्रदर्शन
हितेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार होती, उसके गलत फैसलों का विरोध सभी दलों के नेता मंडी के चौहाटा बाजार में मिलकर करते थे। राजनीति से ऊपर उठकर जनता के लिए लड़ी गई लड़ाई के सुखद परिणाम भी सामने आते थे। उन्होंने हद गंदी हो चुकी राजनीति पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आज का दौर ऐसा नहीं है, आज तो मात्र राजनीति की जाती है। उस समय जनसेवा और ईमानदारी पहली शर्त होती थी।

जोनल अस्पताल मंडी आए थे पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद
पंडित गौरी प्रसाद इतने प्रभावशाली नेता थे कि इनके कार्यकाल में मंडी के जोनल अस्पताल में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी व्यवस्थाएं जांचने आए थे। इसके साथ ही पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के साथ भी इनके अच्छे संबंध रहे, जिसका लाभ प्रदेश को मिलता रहा है।

राज के कैंडिडेट की जमानत करवाई जब्त
पंडित गौरी प्रसाद लौहार से आकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए और वर्ष 1940 में प्रजा मंडल के अध्यक्ष स्वामी पूर्णानंद के नेतृत्व में प्रजामंडल मूवमेंट में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने मंडी के राजा की तानाशाही के खिलाफ अभियान चलाया। वर्ष 1942 में मंडी रियासत के राजा ने स्टेट लेजिसलेटिव काउंसिल का गठन किया। तत्पश्चात बल्ह से राजा के उम्मीदवार राय साहब के खिलाफ चुनाव लड़ा और राय साहब की जमानत जब्त करवाई।तदोपरांत स्टेट लेजिसलेटिव काउंसिल में आ गए और लोगों की भलाई के लिए बहुत काम किया।

छह महीने रहे जेल में
पंडित गौरी प्रसाद वर्ष 1947 तक प्रजामंडल मूवमेंट में जिलाध्यक्ष भी रहे। इसी दौरान मंडी राजा ने इन्हें छह महीने के लिए जेल में बंद कर दिया। हालात इतने खराब थे कि सभी बंदियों को मारने के आदेश होने वाले थे, लेकिन इतने में देश आजाद हो गया और प्रजामंडल का कांग्रेस में विलय हो गया। वर्ष 1947 से 1951 तक कांग्रेस के पहले जिलाध्यक्ष रहे और 1951 में रिवालसर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे।

सादे समारोह में होती थी शपथ, खुद धोते थे कपड़े
हिमाचल प्रदेश में पहली विधानसभा के गठन के दौरान बहुत ही सादे समारोह में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाता था, जिसमें जीरो बजट खर्च किया जाता था, लेकिन आज के दौर में करोड़ों रुपए खर्च कर शपथ ग्रहण समारोह दिखावे और खर्चीले समारोह बनकर रह गए हैं। सुबह चार बजे उठने वाले पंडित गौरी प्रसाद ने ताउम्र खादी वस्त्र ही धारण किए और अपने कपड़े खुद धोए और प्रेस किए।

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