अनियंत्रित ब्लास्टिंग कटिंग से नुकसान का खतरा
- सामरिक दृष्टि से बन रहे रोड के किनारे ढांक पर लग रहे हैं कच्चे डंगे
निर्माणाधीन एनएच 3 राष्ट्रीय उच्च मार्ग जालंधर से मंडी वाया सरकाघाट धर्मपुर जो कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, उसका कार्य गाबर कंपनी की सबलैटिंग बीआर कंपनी द्वारा किया जा रहा है। कंपनी द्वारा पाड़छु से हुक्कल तक अनियंत्रित बलास्ट व कटिंग के कारण बिन बारिश के ही पहाड़ियां दरक रही हैं तो बरसात में क्या होगा, इस आशंका से लोग परेशान हैं। धर्मपुर मुख्यालय जोकि पूर्ण रूप से सोन खड्ड के किनारे पर स्थित है उसको बरसात में अवैध डंपिंग से भारी नुकसान हो सकता है। कंपनी द्वारा पाड़छु से हुक्कल के बीच की गई अनियंत्रित ब्लास्टिंग कटिंग का सारा मलवा खड्ड में गिराया गया है, जिसे हटाना भी असंभव है, मलवे से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। दूसरा कंपनी की कार्य प्रणाली भी संदिग्ध है क्योंकि रोड़ के किनारे ढांक पर अधिकतर डंगे जाली में पत्थरों को भरकर लगाए जा रहे हैं जिनका गिरना भी निश्चित है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों में जगदीश चंद, नानकचंद, रणताज सिंह, हंसराज, कुलदीप सिंह, चेतराम, रतनचंद आदि का कहना है कि कंपनी द्वारा एक तो पहले ही सारा मलवा खड्ड में गिराया गया है, दूसरा किनारों पर बड़े बड़े कच्चे डंडे लगाए जा रहें हैं जिनका गिरना भी निश्चित है।यह रोड़ सामरिक दृष्टि से बनाया जा रहा है और ढांक पर बड़े बड़े कच्चे डंगे लगाए जा रहे हैं जो कि लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि रोड़ सामरिक दृष्टि से बनाया जा रहा है, तो इस पर पक्के आरसीसी डंगे ही लगने चाहिए, ताकि भविष्य में दोबारा न लगाने पड़ें। बता दें कि बरसात में सोन खड्ड में संपूर्ण धर्मपुर क्षेत्र का पानी इकठ्ठा होकर उग्र रूप लेकर बहता है, जिससे बाढ़ और नुकसान की संभावना कई गुना बढ़ गई है। रोड़ से ऊपर नीचे सैकड़ों पेड़ पौधे कटिंग और अवैध डंपिंग से नष्ट हो चुके हैं। रोड़ और खड्ड के आस पास की अधिकांश भूमि वन विभाग की है, प्रशासन आंखे मूंदे मौन है, जनता परेशान है।मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून जल्द ही दस्तक देगा और कुछ ही दिनों के बाद बरसात शुरू हो जाएगी। खड्ड में मलबे को देखकर लोगों में दहशत का माहौल है। कंपनी के प्रभारी जितेंद्र पांडे का कहना है ब्लास्टिंग से मलवा गिरा है जिसका पॉल्यूशन विभाग को मुआवजा दिया गया है जबकि प्रश्न अवैध डंपिंग, सैकड़ों नष्ट हुए पेड़ पौधों तथा भविष्य में बाढ़ के खतरे का है। उधर, पॉल्यूशन विभाग का कहना कि कंपनी द्वारा अभी तक कोई भी मुआवजा जमा नहीं कराया है। स्थानीय लोगों की मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार से गुहार है कि कंपनी कार्य प्रणाली की निष्पक्ष जांच हो और नुकसान के प्रति कंपनी की जवाबदेही निश्चित की जाए।












