बरसात बनी आफत, रिवालसर झील में फिर समाई गाद
-कैचमेंट एरिया से निकले गाद से झील के पर्यावरण को हुआ नुकसान
क्षेत्र में हुई भारी बारिश से रिवालसर झील के पर्यावरण को नुकसान हुआ है। झमाझम बारिश के दौरान कैचमेंट एरिया से बहने बाले नाले उफान पर आ गए और पानी के साथ हजारों टन मलवा पवित्र झील में समा गया जिससे पानी का रंग मटमैला हो गया। इस दौरान झील के साथ लगती पहाड़ी पर भारी भूस्खलन हुआ है जिसके कारण भारी संख्या में बांस के पेड़ उखड़ कर मलवे के साथ झील के काफ़ी नजदीक पहुंच गये एक भारी भरकम पेड़ तो जड़ो के साथ उखड़ कर झील के अंदर ही गीर गया गनीमत रही कि इस दौरान यहां पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था जिस से एक बड़ा हादसा होने टल गया। झील को बार- बार हो रहे नुकसान के पीछे ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना बताया जा रहा है। गौरतलब है कि जब भी रिवालसर में बारिश होती है तो कैचमेंट एरिया से निकलने बाले पानी की निकासी को लेकर बनाई गई नालियां गाद और मिट्टी से भर जाती है।जिसके बाद यह मलवा सड़क मार्ग से बहता हुआ झील में समा जाता है। गत कई वर्षों से ऐसा ही दृश्य देखनो को मिल रहा है। हालांकि नगर पंचायत द्वारा झील परिक्रमा क्षेत्र में लाखों खर्च कर पानी की निकासी को लेकर बड़ी नालियों का निर्माण करवाया है लेकिन उफनते नालों के बीच इन नालियों का आकर बौना पड़ गया है। नालियां बार- बार चोक हो रही है जिससे झील के पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। झील में लगातार समा रही मिट्टी से इसके अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। एडवोकेट हाई कोर्ट शिमला देवन खन्ना, डीएजी संस्था के अध्यक्ष नरेश शर्मा सहित अन्य पर्यावरण प्रेमियों ने झील के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की है, वहीं नगर पंचायत उपाध्यक्ष रिवालसर कश्मीर सिंह यादव तथा मनोनीत पार्षद लक्ष्मी दत्त शर्मा ने बारिश से नगर पंचायत को हुए नुकसान की सरकार से भरपाई मांगी है।












