कुल्लू में होली के बहाने रिश्ते सहेजने की रिवायत
कुल्लू जिले में 40 दिन तक चलने वाले होली उत्सव को लेकर लोगों में काफी जोश और उमंग है। बैरागी समुदाय के लोग ब्रज की तर्ज पर होली उत्सव में विशेष भूमिका निभा रहे हैं और होली के बहाने रिश्ते सहेजने की कोशिश में जुटे हैं। भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि बैरागी समुदाय के लोग अपने से बड़ों के मुंह और सिर में गुलाल नहीं लगाते, बल्कि वे चरणों में गुलाल फेंकते हैं और उम्र में अपने से छोटे व्यक्ति के सिर पर गुलाल फेंककर आशीर्वाद देते हैं, जबकि हम उम्र के लोग एक-दूसरे के मुंह पर गुलाल लगाकर उत्सव मनाते हैं। 40 दिन तक भगवान रघुनाथ को सुल्तानपुर स्थित मंदिर में हर रोज गुलाल उड़ाया जाता है। लोग रोजाना भगवान रघुनाथ जी के चरणों में पहुंचकर होली की शुरुआत करते हैं। इसके बाद जगह-जगह ब्रज की तर्ज पर होली के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। कुल्लू जनपद में राजा जगत सिंह का शासनकाल वर्ष 1637 से 1662 तक रहा है। इस दौरान आयोध्या से भगवान राम की मूर्ति भी यहां लाई गई थी। पिछले 400 साल से बसंत पंचमी पर होली का आगाज होता है। देश की होली से एक दिन पूर्व ही कुल्लू में होली चलती है। इस बार भी इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। बैरागी समुदाय के विनोद महंत, ओम प्रकाश महंत, राज कुमार महंत, दीपक महंत, विनोद महंत का कहना है कि उनकी यह होली बहुत पुरानी है। हम रिश्तों की मर्यादाओं को सहेज रहे हैं।
ब्रज की तर्ज पर मनाते हैं होली
बैरागी समुदाय के लोग कुल्लू में ब्रज की तर्ज पर होली को मनाते हैं। ब्रज की भाषा में होली के गीत वृंदावन के बाद कुल्लू घाटी में ही गूंजते हैं। परंपरागत इन गीतों को गाते हुए यह समुदाय 40 दिन तक इस होली उत्सव को मनाता है। खासकर ब्रज की भाषा में यह समुदाय 'सखी री कोई मोड़ लैया वन को चले दोनों भाई' गीत राम और लक्षमण व सीता के बनवास जाने की व्याख्या करते हैं।
डफली और झांझ है शान
होली के गीतों को रंगत देने के लिए बैरागी समुदाय के लोग डफली और झांझ आदि साज का इस्तेमाल करते हैं। इन साजों का प्रयोग सिर्फ ब्रज में ही होता है। इस समुदाय की ओर से मनाई जाने वाली यह होली रघुनाथ से भी जुड़ी हुई है। इस होली का संबंध नग्गर के झीडी और राधा-कृष्ण मंदिर नग्गर ठावा से भी है। इस समुदाय के गुरु पेयहारी बाबा रहते थे और उन्हीं की याद में इस समुदाय के लोग टोली बनाकर नग्गर के ठावा और झीडी में जाकर भी होली के गीत गाते हैं।