जोगिंद्रनगर में पांच दिवसीय राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला शुरू, उपायुक्त अपूर्व देवगन ने किया शुभारंभ
हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संजोए हुए जोगिंद्रनगर का राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला विधिवत रूप से आरंभ हो गया। यह पांच दिवसीय भव्य आयोजन 01 अप्रैल से 05 अप्रैल तक चलेगा। मेले का शुभारंभ उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया। पुराने मेला मैदान में चौहारघाटी के आराध्य देव श्री हुरंग नारायण और पहाड़ी बजीर देव श्री पशाकोट सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद भव्य जलेब निकाली गई। उपायुक्त ने स्वयं इस जलेब की अगवानी की और फिर मेला मैदान में झंडा फहराकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक, राजस्व प्रशिक्षण संस्थान जोगिंद्रनगर, सतीश कुमार शर्मा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
परंपरा और श्रद्धा का संगम
मेले के शुभारंभ अवसर पर उपायुक्त अपूर्व देवगन ने समस्त प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देव संस्कृति और आस्था हिमाचल प्रदेश की प्राचीन एवं समृद्ध धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि मेले और त्योहार न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में सहायक होते हैं, बल्कि इससे समाज में नई ऊर्जा, उल्लास और उत्साह का संचार भी होता है। मेलों के माध्यम से आपसी भाईचारे की भावना को बल मिलता है, जो सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है।
हिमाचल की देव संस्कृति की अनूठी पहचान
उपायुक्त ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति की पहचान केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। लघु शिवरात्रि मेला जोगिंदर नगर में हर वर्ष सैकड़ों देवी-देवता अपने भक्तों को आशीर्वाद देने पधारते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो जाता है।
नई पीढ़ी के लिए सीखने का अवसर
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हमारी युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उसे संरक्षित करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस दौरान न केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों का ज्ञान मिलता है, बल्कि लोक कला, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प जैसी सांस्कृतिक धरोहरों को भी सहेजने का मौका मिलता है।
भक्तिमय हुआ जोगिंद्रनगर
लघु शिवरात्रि मेले के पहले दिन से ही पूरे जोगिंदर नगर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। मेला मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय निवासी और पर्यटक पहुंचे। देवी-देवताओं की पारंपरिक शोभायात्रा यानी जलेब के दौरान लोगों ने पूरे भक्ति भाव से अपने आराध्य देवों का स्वागत किया।
पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
मेले के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ प्रदेशभर से आए कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा, मेले में विभिन्न तरह की झांकियां, मेलों में लगने वाली दुकानें और खानपान के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह से दुरुस्त रखी गई है। प्रशासन ने मेले के सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के इस पावन आयोजन का आनंद उठा सकें।
पांच दिवसीय मेले का समापन 5 अप्रैल को
पांच दिन तक चलने वाले इस मेले का समापन 5 अप्रैल को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा। समापन समारोह में प्रदेश के गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रहने की संभावना है।