लंबी माथापच्ची के बाद चुने जिले के पांचों मंडलाध्यक्ष
लंबी माथापच्ची के बाद आखिरकार हमीरपुर जिले के उन पांच मंडल अध्यक्षों का ऐलान हो ही गया, जो नेताओं के गले की हड्डी बने हुए थे। सुजानपुर में सबकुछ शांत माहौल में हो गया, लेकिन हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के दोनों मंडल अध्यक्षों के चुनाव को लेकर पहले से ही गहमागहमी थी। वीरवार को जो बैठक पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग की मौजूदगी में हुई, उसमें भी परंपरागत भाजपा से जुड़े हुए लोगों ने शब्दबाणों के जरिए खरी-खोटी सुनाने में कोई कोर- कसर नहीं छोड़ी। हालांकि अंतत: यहां हुआ वही, जो विधायक आशीष शर्मा चाहते थे। उन्हीं के समर्थक काबिज हुए हैं। यहां दोनों पदों पर नए लोगों को आशीष शर्मा ने काबिज करवाने में खूब मशक्कत की। ढटवाल बिझड़ी के मंडल अध्यक्ष के रूप में कुछ समय पहले चुनाव सभा में जो खलल पैदा हुआ था, उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए यशवीर पटियाल को ही यहां अध्यक्ष के रूप में रिपीट किया गया है। हमीरपुर विस क्षेत्र में क्या नए दौर की राजनीति का वर्चस्व कायम हो जाएगा : सुजानपुर और हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के लिए पहली मर्तबा बैठकों का आयोजन हुआ। यहां दोनों जगह खींचतान ज्यादा थी, इसलिए स्थानीय विधायक अपनी मर्जी के मुताबिक संगठनात्मक नेतृत्व बनाना चाहते थे। उसमें सुजानपुर में तो सब आसान और समझदारी के साथ हो गया, लेकिन क्योंकि हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले आम विधानसभा चुनावों के समय से ही माहौल खराब हो चुका था, तब विधायक और संगठन के दरमियान जो खाई पैदा हुई थी, उसका दौर अभी तक जारी था। अबकी बार यहां उपचुनावों के समय नई परिस्थितियों तैयार हुईं और उनमें आशीष शर्मा विधायक बने थे। मतलब साफ था कि अब भाजपा के संगठन का रूप स्वरूप भी यहां उसी हिसाब से तैयार होना था, क्योंकि इससे पहले विस के आम चुनावों में आशीष निर्दलीय रूप में विधायक बने थे और जब भाजपा के टिकट पर उपचुनाव हुआ, तो भी यहां संगठन और उनके अपने कार्यकर्ताओं के दरमियान काफी घमासान देखा गया था। बस इसीलिए संगठन के ढांचे में भी अब अपना प्रभुत्व आशीष ने तैयार तो कर लिया है, लेकिन देखने वाली बात यही होगी कि आने वाले समय में उनके संगठन में 'धार' किस स्तर की तैयार होगी। क्या पुरानी भाजपा यहां डामाडोल हो जाएगी? इस तरह के यक्ष प्रश्न यहां चुनौती बनकर अभी काफी समय तक खड़े रहेंगे। इनका सामना खुद आशीष को भी करना पड़ेगा। देखना यह होगा कि क्या हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में अब नए दौर की राजनीति का वर्चस्व कायम हो जाएगा?
यशवीर सिंह पटियाल बने ढटबाल के मंडलाध्यक्ष, हुआ भव्य स्वागत
यशवीर सिंह पटियाल सर्वस्मति से ढटवाल मंडल का अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। पूर्व विधायक राजेश ठाकुर की अध्यक्षता में होटल के स्तर में आयोजित कार्यकर्ता बैठक में पटियाल को अध्यक्ष चुना गया है। पटियाल पूर्व में बड़सर मंडल के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे, अब बड़सर विधानसभा क्षेत्र में दो मंडल अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। बड़सर मंडल के पहले ही संजीव शर्मा को मंडल अध्यक्ष चुना गया था। पटवाल क्षेत्र से अब यशवीर सिंह पटयाल नए अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। इस अवसर पर बड़सर विधायक इंद्रदत लखनपाल, जिला परिषद सदस्य संजीव शर्मा, बड़सर मंडल अध्यक्ष संजीव शर्मा, प्रधान यशपाल ठाकुर, सह-मीडिया प्रभारी आशीष ठाकुर, रवि कानूनगो, सुरेंद्र शर्मा महिला मोर्चा अध्यक्ष किरण वाला, जिला उपाध्यक्ष अनीता कुमारी विशेष तौर पर उपस्थित रहे हैं। पूर्व युवा खेल मंत्री एवं सांसद हमीरपुर अनुराग सिंह ठाकुर, विधायक लखनपाल ने मंडल अध्यक्ष बनने पर यशवीर सिंह पटियाल को बधाई दी है। पूर्व विधायक बलदेव शर्मा ने भी ढटवाल मंडल के अध्यक्ष चुने जाने पर पटियाल को बधाई दी है। बिझड़ी पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से पटियाल का स्वागत किया।
कौन-कौन कहां से बने मंडलाध्यक्ष
सुजानपुर टीहरा से जसवंत सिंह, बमसन (टौणी देवी) से विक्रम राणा, हमीरपुर शहरी से पाल शर्मा, हमीरपुर ग्रामीण से जसवीर सिंह, ढटवाल (बिझड़ी) से यशवीर पटियाल मंडलाध्यक्ष चुने गए हैं।
45 वर्ष के क्राइटेरिया का ज्यादातर मंडलों में नहीं हुआ असर
हमीरपुर में निवर्तमान अध्यक्ष आदर्श कांत ने चुनाव बैठक के दौरान कहीं ऐसी बातें कहीं जिसमें उन्होंने यह एहसास करवाने का दम भरा कि मैं तो पहले ही रेस में नहीं था लेकिन पीड़ा निश्चित रूप में मन में होती है। उनका साफ कहना था कि पुराने लोगों को नजरअंदाज करना कितना गलत और सही होगा? इसका एहसास उन्होंने जितनी देर मंच से भाषण दिया, इसी का एहसास करवाया। उन्होंने अभी तंज कसा कि मंडल अध्यक्ष के लिए क्राइटेरिया तो 45 वर्ष का तय हो गया था लेकिन इसका ज्यादातर मंडलों में असर नहीं हुआ। केवल उन्हीं पर लागू करवाया गया।