पंछी के गीतों से गूंजा संगीत सदन, 89वां जन्मदिन मनाया, प्रार्थना से मिली प्रेरणा और लिखे 250 पहाड़ी गीत
मंडयाली एवं पहाड़ी गीतों के रचनाकार एवं संगीतकार केआर पंछी का 89वां जन्म दिवस संगीत सदन मंडी की ओर से मनाया गया। इस अवसर पर केआर पंछी द्वारा लिखे और संगीतबद्ध गीतों की स्वरलहरियों से संगीत सदन का हाल गूंज उठा। इस अवसर नगर निगम मंडी के मेयर वीरेंद्र भट्ट शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने वरिष्ठ गीतकार एवं संगीतकार कांशी राम पंछी को टोपी-मफलर भेंट कर सम्मानित किया। इस संगीतमयी कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। संगीत सदन के कलाकारों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात संगीत सदन के कलाकार सर्वज्ञ ने के.आर. पंछी की लिखी मंडयाली ग़ज़ल -पुच्छी लैंघे मेरा हाल-कधी ना कधी, आई रैहणा मेरा ख़याल कधी ना कधी, सुनाया। इसके पश्चात उन्होंने पंछी की एक और रचना- भायी गई मुंजो ता कुल्लू ता मनाल़ी, लई गई दिलड़ू मेरा गांवां री ग्वाल़ी। इसके अलावा पंछी के लिखे गीतों का गायन संगीत सदन के कलाकारों की ओर से किया गया। इस अवसर पर संगीत सदन के निदेशक उमेश भारद्वाज ने कहा कि केआर पंछी का जन्म आज़ादी से पूर्व तत्कालीन कांगड़ा जिला के बंजार जो वर्तमान में कुल्लू जिला का हिस्सा है में हुआ। बचपन से ही उन्हें संगीत के संस्कार अपने घर में ही माता पिता से मिले। इसके पश्चात हिमाचल के पूर्व संस्कृति मंत्री लालचंद प्रार्थी से पहाड़ी बोली के संरक्षण एवं संवर्धन करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि केआर पंछी उनके संगीत गुरू हैं अब तक उनके लिखे करीब ढाई सौ गीत लोककलाकारों द्वारा गाये जाते हैं। उनके गीतों की अब तक चार-पांच कैसेट मार्किट में आ चुकी है। उमेश भारद्वाज ने बताया कि केआर पंछी ने अपने द्वारा लिखे गीतों का ख़जाना उन्हें सौंप रखा है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि उनके गीतों को संगीतबद्ध कर उनका संरक्षण और संवर्धन किया जाए। अब तक उनके स्टूडियो में उनके करीब तीन दर्जन से अधिक गीतों को संगीतबद्ध कर दिया गया है। इस अवसर पर संगीत सदन के कलाकारों के साथ केआर पंछी ने केक काट कर अपना जन्म दिवस मनाया।