जाबली-कसौली रोपवे प्रोजेक्ट लटका
हिमाचल के परवाणू और शिमला के बीच प्रस्तावित देश के सबसे लंबे 5,602 करोड़ रुपए के रोपवे प्रोजेक्ट के तहत जाबली-कसौली रोपवे को पंख लगने का इंतजार है। यदि योजना सिरे चढ़ी तो आने वाले समय में पर्यटकों के लिए रोमांच से भरपूर होगा। इससे प्रदेश सहित कसौली में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिसूचना के बाद इस प्रोजेक्ट का कार्य अभी ठंडे बस्ते में है। बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर के आधार पर बनने वाले इस रोपवे के टेंडर अवॉर्ड होते ही काम शुरू होगा। करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से पंचकूला-शिमला हाईवे पर बनने वाले इस रोपवे का लोअर टर्मिनल कोटी स्थित गायत्री शक्ति पीठ मंदिर के समीप निर्मित होगा, जबकि कसौली स्थित सर्किट हाउस के करीब इसका अपर टर्मिनल बनाने की योजना है। पौने चार किलोमीटर लंबी रोपवे पर 14 टावर फिट करने का प्रावधान है। 56 कैबिन की आवाजाही की सुविधा होगी। रोपवे की कुल क्षमता एक दिशा की ओर हर घंटे में 1100 लोगों को कसौली तक पहुंचाने की होगी। टेंडर प्रक्रिया में तय किया है कि प्रोजेक्ट अवॉर्ड होने के अढ़ाई साल के भीतर रोपवे बनकर तैयार होगा। निर्माण करने वाली कंपनी इस प्रोजेक्ट पर 40 वर्षों तक अधिकार रहेगा। खास बात यह कि रोपवे के माध्यम से समुद्रतल से 1158 मीटर की ऊंचाई से 1839 मीटर की ऊंचाई का सफर महज 11 मिनट में पूरा होगा। यूरोपियन सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुसार, इस रोपवे की स्पीड 6 मीटर प्रति सेकंड रहेगी। साथ ही हर कैबिन में एक साथ 8 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। यही नहीं हर टावर की ऊंचाई 10 मीटर से लेकर 35 मीटर तक होगी। गौर रहे कि पूर्व विधायक कसौली डॉ. राजीव सहजल ने स्वास्थ्य मंत्री रहते इस रोपवे बनाने की परिकल्पना की थी। प्रोजेक्ट को सरकार के समक्ष बजट प्रस्तुत किया था। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड की ओर से प्रस्तावित स्पेशल पर्पज व्हीकल के तहत रोपवे को मंजूरी मिली है।