हिमाचल प्रदेश में नशा निवारण केंद्रों की स्थापना के लिए नई पहल
हिमाचल प्रदेश में नशा निवारण केंद्रों की स्थापना के लिए रेडक्रॉस सोसायटी और अन्य गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की मदद ली जाएगी। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग ने जिला और तहसील कल्याण अधिकारियों को ऐसे संगठनों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, नशे की रोकथाम के लिए नियुक्त अधिकारियों को सख्ती से अपनी जिम्मेदारी निभाने के आदेश दिए गए हैं, अन्यथा लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई होगी।
सोमवार को अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम का सशक्तिकरण विभाग की निदेशक किरण भड़ाना ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति तैयार की। हाल ही में प्रदेश में चिट्टे (सिंथेटिक ड्रग) के बढ़ते मामलों और इसमें सरकारी कर्मियों और अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होने के कारण सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। अब सभी अधिकारियों को समाज कल्याण के प्रति समर्पित रहते हुए उत्तरदायित्व और आचरण से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को समझने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में समस्त जिला और तहसील कल्याण अधिकारियों को नशे के खिलाफ सख्ती से काम करने के निर्देश दिए गए। यदि किसी भी अधिकारी की संलिप्तता इस प्रकार के मामलों में पाई जाती है, तो विभाग को तुरंत जानकारी देने को कहा गया है। ऐसे मामलों में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, हर जिले में नशा निवारण केंद्र स्थापित करने के लिए रेडक्रॉस सोसायटी और अन्य NGOs के सहयोग से प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजने के आदेश भी दिए गए। बैठक में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई और अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया कि वे विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित बजट का सही समय पर उपयोग सुनिश्चित करें ताकि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।