नाहन धारक्यारी बनोग रोड पर सड़क निर्माण के बाद भू माफिया सक्रिय
जिला मुख्यालय नाहन के बनोग-धार क्यारी क्षेत्र में एक बार फिर भू माफियाओं का गिरोह सक्रिय हो गया है। इसकी वजह वर्षों तक सैन्य-सिविलियन विवाद में रही सड़क के पक्का होने की घोषणा बताई जा रही है। हालांकि, यह केवल एक अल्टरनेटिव बाईपास रोड है। यह क्षेत्र नाहन आर्मी एरिया से जुड़ा हुआ है, फिर भी लैंड माफिया और प्रॉपर्टी डीलर्स विवादित जमीनों को बेचने की कवायद में जुट गए हैं। प्रशासन ने अधिकतर जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगा रखे हैं, जिनमें जमीन खरीदने या मकान बनाने से पहले सैन्य परमिशन लेने की अनिवार्यता बताई गई है। इसके बावजूद, लैंड माफिया झूठी दलीलों के साथ प्लॉट अथवा जमीन बेचने के प्रलोभन दे रहे हैं। इस सड़क का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत स्वीकृत किया गया था। लेकिन करीब 3 किलोमीटर के हिस्से पर सैन्य प्रशासन ने निर्माण पर रोक लगा दी थी। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने इस विवाद को सुलझाने के लिए हाई पावर कमेटी गठित की थी। इसके बाद, नाहन के पूर्व विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने इसे डिफेंस मिनिस्ट्री के साथ सुलझाया था। वहीं, वर्तमान विधायक अजय सोलंकी ने कच्ची सड़क को पक्का करने और कांशीवाला के साथ कनेक्टिविटी दिलाने के प्रयास किए, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस सड़क को पक्का करने के आदेश के साथ बजट को भी मंजूरी दे दी है। इसके बाद, लैंड माफिया की गतिविधियां और तेज हो गई हैं। यह सड़क न तो राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत आती है और न ही आ सकती है। टेक्निकल कंसलटेंसी के अनुसार, इसका बड़ा हिस्सा आबादी वाले क्षेत्र से गुजरता है, जिससे इसे नेशनल हाईवे के मानकों पर नहीं उतारा जा सकता। साथ ही, नेशनल हाईवे योजना में बाईपास के लिए टनल को ही मुख्य विकल्प माना गया है। सूत्रों के अनुसार, एक बड़ी विवादित जमीन, जो रेणुका जी क्षेत्र के किसी व्यक्ति की थी, कुछ लोगों ने खरीद ली है। इसमें कुछ बेनामी हिस्सेदारी भी शामिल है। संभावना जताई जा रही है कि जमीन बिकने और वहां निर्माण कार्य शुरू होने के बाद, असली हिस्सेदार न्यायालय का रुख कर सकते हैं। ऐसे में, इस क्षेत्र में जमीन खरीदने वालों के लिए भविष्य में दिक्कतें आ सकती हैं।
निर्माण के लिए सैन्य अनुमति आवश्यक
इस क्षेत्र में जमीन अथवा प्लॉट खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को छोटे-बड़े निर्माण के लिए बार-बार सैन्य प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। नाम न छापने की शर्त पर वेस्टर्न कमांड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सैन्य भूमि के आसपास सुरक्षा कारणों से किसी भी तरह के निर्माण के लिए अनुमति लेना अनिवार्य होगा।