...यहां मनाया जाता है मुखौटों का पर्व, अश्लील गालियों का चलता है दौर
देवभूमि हिमाचल के हर क्षेत्र के अपने-अपने त्योहार और परंपराएं हैं। इन त्योहारों और परंपराओं की रीत सदियों से चलती आ रही है। ऐसा ही एक उत्सव है फागली, जोकि बहुत ही अनूठा है। यह उत्सव कुल्लू जिला सहित लाहौल-स्पीति में मनाया जाता है। फागली उत्सव को दोनों जिले के लोग अपने तौर-तरीके से मनाते हैं। यूं कहें तो त्योहार एक है, लेकिन उसको मनाने का सभी का अपना- अपना तरीका है। कुल्लू में इस उत्सव का आयोजन फाल्गुन संक्रांति से होता है और लगभग एक माह तक चलता है। फाल्गुन माह से ही इसका नाम फागली पड़ा है। लोगों का मानना है कि माघ माह में देवता स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं फाल्गुन माह की संक्रांति के बाद देवता स्वर्ग प्रवास से लौटना शुरू करते हैं। स्वर्ग प्रवास से लौटने के बाद देवता आने वाले साल के लिए भविष्यवाणी करते हैं, जिसे बरसोआ कहा जाता है यानि वार्षिक फल। बरसोआ के दौरान होने वाला मुखौटा नृत्य आकर्षण का केंद्र रहता है। इस दौरान कुछ चयनित लोग मुंह पर मुखौटा (मंडयाले) और शरीर पर शरूली नाम की घास पहनकर नृत्य करते हैं। नृत्य देखने के लिए पूरे गांव के महिला, पुरुष व बच्चे सभी एक साथ इकठ्ठे होते हैं। इस दौरान अश्लील गालियां भी दी जाती हैं, कई स्थानों पर महिलाएं भी अश्लील गालियां गीतों के माध्यम से गाती हैं, जिसका कोई बुरा नहीं मानता। लाहौल-स्पीति के अलावा कुल्लू के बंजार के थाटीबीड़, गुशैणी व तीर्थन घाटी के विभिन्न गांवों में हर वर्ष संक्रांति के बाद फागली उत्सव मनाया जाता है। क्यों मनाई जाती है फागली घाटी के लोगों का मानना है कि देवताओं के दो माह तक स्वर्ग प्रवास के दौरान आसुरी शक्तियां बढ़ जाती हैं, जिन्हें भगाने के लिए फाल्गुन संक्रांति के दिन से ही फागली उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान हारियानों के साथ देवता भी परिक्रमा में शरीक होते हैं व बुरी शक्तियों को भगाने के लिए अश्लील गालियां निकाली जाती हैं।
क्या है मान्यता
फागली के पीछे एक और कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि जब देवता और राक्षसों की बीच एक समय युद्ध हुआ था। युद्ध में हारे हुए राक्षसों के मुखौटे पहनकर नृत्य किया था है और अश्लील गालियां दी थी, तब से क्षेत्र की रक्षा के लिए मान्यता और परंपरानुसार हर साल फागली उत्सव मनाते हैं और कुछ चयनित किए हुए लोग मुखौटा नृत्य कर गांव से अश्लील गालियां देकर आसुरी शक्तियों को भगाते हैं। घाटी में अश्लील गालियों को फागली उत्सव का एक अंग माना जाता है, इसलिए इसका बुरा नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पूरे साल भर गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
क्या होते हैं मंडयाले
पर्व को मनाने के लिए विशेष लोग मुंह में मुखौटे लगाकर तथा सरूली नामक घास के कपड़े पहनकर इस पुरातन परंपरा का निर्वहन करते हैं। इन्हें मंडयाले कहा जाता है। घास से बने हुए चोलू और हाथ में लकड़ी का डंडा उठा कर एक गांव से दूसर गांव तक नृत्य करते हुए बड़े प्रांगण में एकत्रित हो जाते हैं।