राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेला के लिए रवाना हुए बड़ा देव कमरूनाग
जिला मंडी के आराध्य एवं बारिश के देवता देव कमरूनाग सोमवार को राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेला में शिरकत करने सुंदरनगर के लिए प्रस्थान कर गए हैं। देव कमरूनाग ने ग्राम पंचायत रोहांडा के गांव मझोठी स्थित कोठी से अपने लाव लश्कर सहित सुंदरनगर की ओर कूच कर दिया है। इस मौके पर देव कमरूनाग का उनकी कोठी(देवस्थान) में विधिवत पूजन किया गया और उसके बाद देवलुओं तथा बजंतरियों संग देवता राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले में शिरकत करने के लिए निकल गए हैं। इस दौरान देवता लगभग 37 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर सुंदरनगर पहुंचेंगे। बता दें कि चैत्र नवरात्रि के पांचवें नवरात्रे 2 अप्रैल से पांच दिवसीय राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेला सुंदरनगर का आयोजन किया जाता है। देव कमरूनाग 1 अप्रैल को सुंदरनगर शहर की सीमा चांबी में पहुंचेंगे। जहां पहुंचने पर देव कमेटी और राज्यस्तरीय देवता मेला कमेटी उनका स्वागत करेगी। जानकारी देते हुए बड़ा देव कमरूनाग मझोठी रोहांडा के गुर मुनी लाल ने कहा कि बड़ा देव कमरूनाग 2 अप्रैल को सुकेत देवता मेला के शुभारंभ पर सुबह 11 बजे शुकदेव ऋषि की तपोस्थली शुकदेव वाटिका में पहुचेंगे। जहां से मेला ग्राउंड तक आयोजित होने वाली शोभायात्रा में शिरकत कर वह इसकी शोभा बढ़ाएंगे। देव श्री कमरूनाग कमेटी मझोठी रोहांडा के सचिव दुनी चंद ठाकुर ने बताया कि बड़ा देव कमरूनाग विष्णु स्वरूप पूजे जाते हैं। सभी भी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले देव कमरूनाग हैं और उनकी पवित्र झील में जाकर मान्यता पूर्ण होने पर श्रद्धानुसार चढ़ावा चढ़ाया जाता है।
आराध्य देव कमरूनाग की अनूठी दास्तान
देव कमरूनाग मंडी और सुकेत रियासत क्षेत्र की आस्था में रचे बसे हैं। उपमंडल गोहर के कांढी वाले देव कमरूनाग के सूरजपखे में चतुर्भुज स्वरूप में भगवान विष्णु का अंकन मिलता है। वर्ष 1935 में मंडी के तत्कालीन राजा जोगिंद्र सेन ने कमरूनाग के हारियानों को सौंपे मखमल के कपड़े पर देव कमरुनाग को इसी देव स्वरूप में उकेरा था। इस सूरजपखे रूप में देव कमरुनाग द्वारा मंडी जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में शिरकत की जाती है। वहीं उपमंडल सुंदरनगर के रोहांडा की मझोठी कोठी वाले देव कमरुनाग सुकेत की आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां सूरजपखे पर देव कमरूनाग का मुख मोहरे के रूप में है और साथ ही नीचे की ओर पांच अन्य मुख मोहरों का अंकन मिलता है। मान्यतानुसार ये पांच मुख पांडवों के बताए जाते हैं। इस सूरजपखे द्वारा राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेला सुंदरनगर में शिरकत की जाती है। एक ही देवता के ये दो भिन्न स्वरूप इसी प्रकार से अपने-अपने क्षेत्रों में भक्तजनों को आशीर्वाद देते हैं।