अस्पताल में रोजाना 1500 रोगियों की ओपीडी, फिर भी सुलभ शौचालय नही
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में आउटडोर पेशेंट्स को शौचालय की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से इस वर्ग को बीमारी की हालत में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में रोजाना 1500 रोगी उपचार को पहुंचते हैं। बावजूद इसके आउट डोर पेशेंट्स के लिए एक मात्र शौचालय है। कोई रोकटोक नहीं होने से इसमें बाहरी लोग भी इसका उपयोग करते हैं। शौचायल में अत्यधिक बोझ होने से यहां हमेशा गंदगी का आलम रहता है। एमएस ऑफिस के बगल में महिला, पुरुषों का शौचालय है, लेकिन इसकी हालत इतनी खराब है कि यहां जाने से पहले मुंह ढक्कर जाना पड़ता है। महिला शौचालय की हालत खराब होने के साथ ही यहां एक ही टॉयलेट पॉट होने से अन्य महिलाओं को लाइन में लगना पड़ता है। इससे खासकर गर्भवती महिलाओं को दिक्कतें पेश आती हैं। महिला शौचालय के बगल में पुरुष शौचालय होने से यहां जाना महिलाओं के लिए असहज हो जाता है। शौचालय की गंदगी से संक्रमण का भी खतरा रहता है। ऐसे यहां पर सुलभ शौचालय की मांग है। अस्पताल में बड़ी संख्या में महिलाएं उपचार को आती हैं। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को अस्पताल पहुंचने पर शौचालय की दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
सीनियर सिटीजन को भी दिक्कत
शौचालय की दयनीय हालत से सीनियर सिटीजन भी परेशानी झेलते हैं। पुरुषों के एकमात्र शौचालय में हमेशा भीड़ रहती है। ऐसे में बुजुर्गों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। बावजूद इसके आज तक अस्पताल में सुविधाओं से लैस शौचालय नहीं बन पाया। सीनियर सिटीजन डॉ. कुमार सिंह का कहना है कि जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। पहले घंटों पर्ची काउंटर में खड़े रहना पड़ता है फिर अगर टॉयलेट जाना पड़े, तो यहां पर भी भीड़ रहती है। टॉयलेट की गंदगी देखकर वापस लौटना पड़ता है। सरकार बुनियादी सुविधाएं भी दे सकती है, तो ऐसे अस्पताल का क्या फायदा।