भरमाड़ पीएचसी का भवन निर्माण अधर में, दर्जा बढ़ाने की उठी मांग
जवाली विधानसभा क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) भरमाड़ की स्थिति लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। यह स्वास्थ्य केंद्र करीब 15,000 की आबादी को चिकित्सा सुविधा प्रदान करता है, लेकिन अब तक इसका दर्जा नहीं बढ़ पाया और न ही शिलान्यास के बाद नया भवन तैयार हो सका। 2014 में तत्कालीन सीपीएस नीरज भारती ने इस नए भवन का शिलान्यास किया था, जिसमें ओपीडी और आवासीय परिसर का निर्माण प्रस्तावित था। इसमें चिकित्सकों और स्टाफ के लिए क्वार्टर भी बनने थे, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई। स्वास्थ्य केंद्र पुराने भवन में ही चल रहा है, जिसमें सीमित जगह और संसाधनों की कमी बनी हुई है।
स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीजों को हो रही परेशानी
वर्तमान में अस्पताल में एकमात्र चिकित्सक कार्यरत है। अगर वे छुट्टी पर चले जाएं, तो ओपीडी सेवा पूरी तरह से ठप हो जाती है। ऐसे में मरीजों को जवाली या रैहन अस्पताल का रुख करना पड़ता है। इसके अलावा, आवासीय सुविधा न होने से डॉक्टरों और स्टाफ को किराए पर रहना पड़ता है, जिससे आपातकालीन सेवाएं और रात के समय चिकित्सा सुविधा भी प्रभावित होती है। स्थानीय पंचायत प्रधान सुशील कुमार ने मांग की कि स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाकर यहां कम से कम दो चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। स्थानीय निवासी नरेश कुमार का कहना है कि रात्रि में कोई डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है, इसलिए दो चिकित्सकों की नियुक्ति जरूरी है। विद्या सागर ने भी स्वास्थ्य केंद्र में लैबोरेटरी की सुविधा शुरू करने की मांग उठाई। कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार का कहना है कि कांग्रेस शासन में भवन का शिलान्यास हुआ था, लेकिन भाजपा सरकार में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब कांग्रेस सरकार इसके निर्माण के लिए पूरा प्रयास करेगी। पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस भवन का शिलान्यास किया था, लेकिन भाजपा शासन में इसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब कांग्रेस सरकार इस कार्य को फिर से शुरू करवाने के लिए अधिकारियों से चर्चा करेगी। लोक निर्माण विभाग जवाली के अधिशासी अभियंता एमएल शर्मा ने बताया कि भवन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण हो चुका है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। भरमाड़ पीएचसी क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। अब सरकार और स्थानीय प्रशासन की पहल पर ही इसके भविष्य का फैसला होगा।