गोबिंद सागर झील पर बनेगा उत्तर भारत का सबसे लंबा केबल स्टेड पुल, पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी
लठियाणी से बिहडू तक प्रस्तावित उत्तर भारत का सबसे लंबा 860 मीटर फोरलेन केबल स्टेड और वायाडक्ट पुल बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्रथम चरण की मंजूरी मिल गई है। इस पुल के साथ दोनों ओर आठ किलोमीटर लंबा फोरलेन भी बनाया जाएगा।
पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी
इस प्रोजेक्ट के तहत वन भूमि से 380 पेड़ काटे जाएंगे, जबकि सरकारी और निजी भूमि पर कुल 3,688 पेड़ प्रभावित होंगे, जिससे कुल पेड़ों की संख्या 4,068 हो जाएगी। सरकारी और निजी भूमि पर पेड़ काटने की मंजूरी अभी लंबित है। वन भूमि से संबंधित मुआवजे की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
897 करोड़ रुपये की लागत से होगा निर्माण
इस पुल का निर्माण परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा और इसके लिए 897 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत प्रस्तावित है। टेंडर बिडिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और तीन नामी कंपनियां इसके लिए प्रतिस्पर्धा में हैं।
हमीरपुर-ऊना की दूरी होगी कम, यात्रा में 40 मिनट की बचत
इस पुल के बनने से हमीरपुर-ऊना वाया बड़सर की दूरी 80 किलोमीटर से घटकर 59 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे यात्रा का समय 40 मिनट तक कम हो जाएगा।
पुल की संरचना और निर्माण कार्य
- केबल स्टेड पुल की लंबाई: 480 मीटर
- वायाडक्ट पुल की लंबाई: 380 मीटर
- माइनर पुल: 50 मीटर
- अतिरिक्त वायाडक्ट पुल: 150 मीटर
- दो व्हीकल ओवरपास और दो व्हीकल अंडरपास भी बनाए जाएंगे।
14 गांवों से होकर गुजरेगा प्रोजेक्ट
यह पुल गोबिंद सागर झील के दोनों किनारों (अलयाना और बदघर) को जोड़ेगा और लठियाणी से बिहडू की सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। वर्तमान में लोगों को बंगाणा होकर सफर करना पड़ता है या मोटरबोट का सहारा लेना पड़ता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साइट इंजीनियर सुशील ठाकुर ने बताया कि लठियाणी से बिहडू पुल के निर्माण के लिए पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण की स्वीकृति मिल गई है, और जल्द ही द्वितीय चरण की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।