खिचड़ी व कुल्लवी पकवानों की खुशबू से महकी घाटी
जिला कुल्लू में रविवार को मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह ही लोगों ने जहां ब्रम्हा मुहूर्त में जिले के विभिन्न तीर्थ स्थानों में जहां श्रद्धालुओं ने आस्था की डूबकी लगाई। वहीं, उसके बाद अपने घरों में अलग-अलग तरह के कुल्लवी व्यंजनों के अलावा खिचड़ी बनाई और मेहमानबाजी का दौर भी शाम तक जारी रहा। घाटी पहाड़ी व्यंजनों और देसी घी व खिचड़ी की खुशबू से महक उठी। वहीं, जिलेभर के मंदिरों में भी पूजा-अर्चना की गई। इसके अलावा जिला मुख्यालय कुल्लू के रघुनाथपुर स्थित रघुनाथजी के मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई। दोपहर के समय भगवान रघुनाथजी के पुजारियों ने सबसे पहले रघुनाथजी, सीता माता व भगवान नरसिंह जी को खिचड़ी का भोग लगाया और उसके पश्चात पुजारियों व महंत समुदाय के लोगों ने भी खिचड़ी का लुत्फ उठाया। इस मौके पर मंदिर में दिनभर भक्तों की भीड़ रही और भजन-कीर्तन का दौर लगातार जारी रहा। रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि हर वर्ष माघ माह के पहले प्रविष्ट मकर संक्रांति के मौके पर रघुनाथ मंदिर में खिचड़ी बनाई जाती है और सबसे पहले भगवान रघुनाथ जी को भोग लगाने के बाद खिचड़ी को प्रसाद के रूप में भक्तों को परोसा जाता है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी परंपरा का बखूबी निर्वहन किया गया और परंपरानुसार पुजारियों व महंत समुदाय के लोगों ने व भक्तों ने प्रसाद चखा। उधर, जिलेभर में लोगों ने एक-दूसरे को जौ की दूब भेंट की और देवी-देवताओं के साथ-साथ बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। वहीं, अधिकतर मंदिरों में देवी-देवता स्वर्ग प्रवास से संक्रांति की शुभ बेला में अपने-अपने देवालय लौटे, जबकि कुछेक घाटी के देवता फाल्गुन की संक्रांति को अपने देवालय लौटेंगे। जिले में देवताओं ने गुर के माध्यम से देवी-देवताओं ने भविष्यवाणियां भी की। मकर संक्रांति के दिन कुल्लू के विभिन्न तीर्थ स्थलों वशिष्ठ, मणिकर्ण, ब्यास-पार्वती संगम स्थल जिया भुंतर सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों में श्रद्धालु संक्रांति का स्नान करके पुण्य कमाया। उधर, बंजार में लोग हर वर्ष अलग अंदाज में मकर संक्रांति मनाते हैं। बंजार के कुछ क्षेत्रों में सुबह चार बजे उठकर एक स्थान पर एकत्र होने के पश्चात लोग ढोल-नगाड़ों की थाप पर प्राकृतिक जल स्रोत तक अंधेरे में मशालों के साथ गए और वहां पर प्राकृतिक जल स्रोत में संक्रांति का स्नान किया। इसके अलावा पुरातन गांव मलाणा में माइनस तापमान के बीच लोगों ने माघी साजे के मौके पर नल के पानी में संक्रांति का स्नान कर पुण्य कमाया। जिले का मलाणा गांव अपने ऐतिहासिक रीति-रिवाजों के लिए देश व दुनियाभर में प्रसिद्ध है और यहां पर देव आदेश ही सर्वोपरि माना जाता है। मलाणा पंचायत के प्रधान राजूरामजी व उपप्रधान रामजी ने बताया कि गांव में स्नान के साथ ही सभी घरों में खिचड़ी बनाई गई। वहीं, दोपहर के समय देवस्थल के समीप हर घर से कुछ न कुछ सामान जिसमें बिस्कट, फल आदि सामान एक जगह एकत्र कर बाद में उसे लोगों में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने बताया कि पोष माह से जिले के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर थे, कुछ देवी-देवता जहां वापस लौट आए हैं, जिससे मकर संक्रांति पर कुछ मंदिरों में पूजापाठ व अन्य देव कार्य शुरू हो गए हैं।
मरीजों व तीमारदारों को देसी घी के साथ दी खिचड़ी
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में अन्नपूर्णा निशुल्क लंगर सेवा में विशेष भोजन का प्रबंध किया गया। इस दौरन मरीजों के तीमारदारों व जरूरतमंद को खिचड़ी, देसी घी व अन्य पौष्टिक व्यंजन परोसे गए। संस्था के अध्यक्ष विनीत सूद ने बताया कि हर साल मकर संक्रांति व अन्य विशेष समय पर अन्नपूर्णा लंगर में भोजन व्यवस्था की जाती है और इस लंगर सेवा के लिए देवभूमि ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से भी लोग अपना सहयोग देते हैं और माता अन्नपूर्णा की कृपा से तीन समय मरीजों के तीमारदारों व जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए भोजन व्यवस्था की जाती है।