चित्रों के माध्यम से संस्कृति से करवाया परिचित
अंतरराष्ट्रीय रौरिक मैमोरियल ट्रस्ट नग्गर में बुधवार को जयपुर आर्ट समिट की ओर से रवि कांत की क्यूरेटरशिप में फागुन शीर्षक के अंतर्गत श्रीलंका और भारत की संस्कृति के ऊपर 18 कलाकारों की चित्रकला प्रदर्शनी का आगाज हुआ। इसका उद्घाटन रौरिक आर्ट गैलरी की रशियन क्यूरेटर लारिसा सुरगिना और भारतीय क्यूरेटर सुरेश कुमार नड्डा ने रिबन काटकर और द्वीप प्रज्वलित कर किया। इस प्रदर्शनी में श्रीलंका के कलाकारों में मनुशिखा पथिराना, विदूशिका हेरात, रविंद्री करियप्पेरूमा, उपुल चमीला, दिलरुक्षी नवरत्ने, अनुरुद्धिका हेमामली, सुधार्शि रानाबाहु, तिलिनि दे सिमोन, सुरश कुमार, बीनू गुप्ता, वेंडी जेंस, कृष्णा टशी पालमो और हर्शित परिहार के चित्र प्रदर्शनी पर हैं। श्रीलंका के चित्रकारों ने श्रीलंका की संस्कृति को चित्रों के माध्यम से व्यक्त किया है, जिसमें उन्होंने वहां के रहन सहन, वेशभूषा, गायन वादन, चित्रकारी आदि को कुछ ही चित्रों में बड़े ही मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत किया है। दूसरी ओर भारत के चित्रकारों ने भारतीय संस्कृति को चित्रों में दर्शाया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति की चित्रकार कृष्णा टशी पालमो ने थांका चित्रकारी और लाहौल की संस्कृति को बड़े ही अनोखे अंदाज में ब्यां किया है। श्रीलंका के चित्रकारों ने शिवरात्रि के दिन शिव के तांडव नृत्य पर चित्र बनाकार मानवता को अध्यात्म का संदेश दिया है। श्रीलंका के ही चित्रकार ने गणेश के चित्र बनाए हैं और बताया कि श्रीलंका में भी गणेश जी की पूजा होती है। भारतीय क्यूरेटर सुरेश कुमार ने श्रीलंका से आए सभी चित्रकारों का स्वागत किया और कहा कि यह दो देशों की संस्कृतियों का आदानप्रदान है, जिससे दो देशों के संबंध मजबूत होते हैं। रशियन क्यूरेटर ने भी रौरिक आर्ट गैलरी में प्रदर्शनी लगाने के लिए सभी श्रीलंकाई और भारतीय कलाकारों का धन्यवाद किया और सभी कलाकारों के चित्रों को बहुत ही सराहा। श्रीलंका के सभी चित्रकारों और भारतीय चित्रकारों ने रौरिक आर्ट गैलरी में प्रदर्शनी लगाने के लिए स्थान देने के लिए डीसी कुल्लू एवं निदेशक आईआरएमटी नग्गर तोरुल एस रवीश एवं रौरिक ट्रस्ट प्रबंधन का धन्यवाद किया। इस अवसर पर रशियन क्यूरेटर सहायक दमित्री सुरगिन, ओलगा कारसेवा, सभी चित्रकार, देश-विदेश के पर्यटक और अन्य गणमान्य मौजूद रहे। इस प्रदर्शनी में लगभग 40 चित्र प्रदर्शन पर हैं।